बुलंदशहर अनूपशहर में 'डॉ. अपॉइंटमेंट' फर्जी ऐप स्कैम: बीमार व्यक्ति के फोन एक्सेस लेकर ठगों ने खाते से ₹18.61 लाख उड़ाए।

‘डॉ. अपॉइंटमेंट’ ऐप का जाल: बीमार व्यक्ति के खाते से ₹18.61 लाख पार

Team The420
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बुलंदशहर। इलाज की तलाश में गूगल पर नंबर खोजना अनूपशहर के एक परिवार को भारी पड़ गया। ‘डॉ. अपॉइंटमेंट’ नामक ऐप डाउनलोड कराकर साइबर ठगों ने बीमार व्यक्ति और उसकी पत्नी के बैंक खातों से कुल ₹18,61,970 उड़ा लिए। मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। जांच में सामने आया है कि ठगों ने ऐप के जरिए मोबाइल का एक्सेस लेकर कई दिनों तक चुपचाप ट्रांजेक्शन अंजाम दिए।
अनूपशहर क्षेत्र के मोहल्ला केदार सहाय निवासी पीड़ित ने तहरीर में बताया कि 1 दिसंबर 2025 को तबीयत खराब होने पर उन्होंने गूगल पर एक चिकित्सक का संपर्क नंबर सर्च किया था। सर्च रिजल्ट में मिले एक मोबाइल नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर से जुड़ा प्रतिनिधि बताया और तत्काल अपॉइंटमेंट दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद उसे ‘डॉ. अपॉइंटमेंट’ नाम से एक ऐप डाउनलोड करने को कहा गया।

ऐप इंस्टॉल कर फोन एक्सेस: संवेदनशील जानकारी पर कब्जा

पीड़ित के अनुसार, उस समय वह अस्वस्थ थे और जल्द परामर्श चाहते थे। भरोसा कर उन्होंने ऐप इंस्टॉल कर लिया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने कुछ आवश्यक अनुमति (परमिशन) देने को कहा, जिसे उन्होंने बिना अधिक जांच-पड़ताल के स्वीकार कर लिया। आशंका है कि इन्हीं अनुमतियों के माध्यम से ठगों ने फोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना ली।
तबीयत खराब रहने के कारण पीड़ित ने कई दिनों तक मोबाइल की गतिविधियों और बैंक संदेशों पर ध्यान नहीं दिया। इसी बीच ठगों ने सुनियोजित तरीके से खाते से रकम निकालनी शुरू कर दी। शिकायत के मुताबिक 19 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच पीड़ित के बैंक खाते से 20 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल ₹10,07,561 निकाल लिए गए। रकम छोटी-छोटी किश्तों में ट्रांसफर की गई, ताकि तुरंत संदेह न हो।
इतना ही नहीं, ठगों ने पीड़ित की पत्नी का खाता भी निशाना बनाया। 20 फरवरी से 26 फरवरी के बीच उनके खाते से ₹8,54,409 की राशि विभिन्न ट्रांजेक्शन के माध्यम से साफ कर दी गई। परिवार को इसकी भनक तब लगी जब 26 फरवरी को मोबाइल पर आए बैंक संदेशों को देखा गया। लगातार डेबिट मैसेज देखकर परिवार के होश उड़ गए।

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साइबर थाने में शिकायत: पुलिस जांच में खुलासे

पीड़ित ने तत्काल बैंक से संपर्क कर खातों को ब्लॉक कराया और इसके बाद साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। ट्रांजेक्शन डिटेल, लाभार्थी खातों और इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यमों की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और उन्हें किस तरह आगे मूव किया गया।
प्राथमिक जांच में यह संकेत मिला है कि ऐप संभवतः रिमोट एक्सेस या स्क्रीन शेयरिंग टूल की तरह काम कर रहा था, जिसके जरिए ठग मोबाइल स्क्रीन और ओटीपी तक देख पा रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि गूगल सर्च के जरिए मिले अज्ञात नंबरों पर बिना सत्यापन भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

साइबर ठगी से बचाव के उपाय: रहें सतर्क

साइबर मामलों के जानकारों का सुझाव है कि किसी भी डॉक्टर या सेवा प्रदाता का नंबर आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय स्रोत से ही लें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड करने और उसे व्यापक अनुमतियां देने से बचें। बैंक खातों के एसएमएस और ईमेल अलर्ट नियमित रूप से जांचते रहें, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता चल सके।
यह मामला एक बार फिर चेतावनी देता है कि डिजिटल सुविधा के दौर में जरा सी लापरवाही लाखों रुपये की चपत में बदल सकती है। सतर्कता ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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