डिजिटल अरेस्ट और ₹58 करोड़ साइबर ठगी केस में म्युल अकाउंट नेटवर्क पर शिकंजा, बैंक मैनेजर समेत आठ के खिलाफ चार्जशीट तैयार

डिजिटल अरेस्ट और ₹58 करोड़ साइबर ठगी कनेक्शन: बैंक मैनेजर समेत आठ के खिलाफ चार्जशीट तैयार, म्युल अकाउंट नेटवर्क की जांच तेज

Team The420
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कानपुर। डिजिटल अरेस्ट और निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर की गई कथित ₹58 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े म्युल अकाउंट नेटवर्क की जांच में कानपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार बैंक अधिकारियों सहित आठ आरोपियों के खिलाफ लगभग 3,500 पन्नों की चार्जशीट तैयार कर ली है। पुलिस के अनुसार यह आरोपपत्र अगले कुछ दिनों में अदालत में दाखिल किया जाएगा। हालांकि मामले का कथित मास्टरमाइंड राजवीर सिंह यादव और उसका करीबी सहयोगी अंचित गोयल अभी भी फरार हैं। दोनों पर ₹25,000-₹25,000 का इनाम घोषित है और उनकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार यह मामला अक्टूबर 2025 में नवी मुंबई में सामने आए डिजिटल अरेस्ट और निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर लगभग ₹58 करोड़ की साइबर ठगी की गई थी। जांच के दौरान यह पता चला कि ठगी से प्राप्त धनराशि विभिन्न म्युल बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर भेजी जा रही थी ताकि धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना कठिन हो सके।

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जांच एजेंसियों के अनुसार पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ जब ठगी की रकम में से लगभग ₹2.5 करोड़ शुभम गौड़ नामक व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंचने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया, जिससे कथित म्युल अकाउंट नेटवर्क का पता चला।

पुलिस का आरोप है कि बर्रा निवासी राजवीर सिंह यादव इस नेटवर्क का कथित सरगना है। जांच में सामने आया कि उसने आगरा निवासी अंचित गोयल के साथ मिलकर विभिन्न बैंकों के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग कर अलग-अलग नाम और पते पर अनेक बैंक खाते खुलवाए। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने और धन के वास्तविक प्रवाह को छिपाने के लिए किया जाता था।

मामले में अब तक चार बैंक अधिकारियों सहित आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में विभिन्न निजी बैंकों के शाखा प्रबंधक, ऑपरेशन मैनेजर, डिप्टी मैनेजर और रिलेशनशिप मैनेजर के अलावा कुछ अन्य सहयोगियों के नाम भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इनकी भूमिका बैंक खाते खोलने, दस्तावेजों के सत्यापन में कथित अनियमितता और वित्तीय लेनदेन को सुविधाजनक बनाने से संबंधित पहलुओं के आधार पर जांची गई है।

पुलिस के अनुसार तैयार की गई लगभग 3,500 पन्नों की चार्जशीट में डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज, तकनीकी विश्लेषण और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त पीड़ितों, पुलिस अधिकारियों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित लगभग 20 लोगों को अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

जांच अभी भी जारी है और पुलिस फरार आरोपियों के अलावा नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भी तलाश कर रही है। अधिकारियों के अनुसार अब तक 13 अन्य संदिग्धों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उनके संभावित बैंक खातों, डिजिटल गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि म्युल बैंक खाते आज अधिकांश बड़े साइबर वित्तीय अपराधों की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन चुके हैं। उनके अनुसार साइबर अपराधी कमीशन का लालच देकर बैंक खाते खुलवाते हैं और उन्हीं खातों के माध्यम से ठगी की रकम को तेजी से विभिन्न स्तरों पर स्थानांतरित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों में मजबूत केवाईसी प्रक्रिया, संदिग्ध लेनदेन की सतत निगरानी और खाताधारकों की जागरूकता ऐसे संगठित साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन के बदले अपना बैंक खाता उपलब्ध न कराएं, क्योंकि ऐसा करना गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

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