देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां म्यूल अकाउंट के जरिए करीब ₹60 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। साइबर क्राइम टीम की कार्रवाई में एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
जांच के अनुसार, यह गिरोह फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी से जुड़े पैसों का ट्रांजैक्शन कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने इसे बड़े स्तर के संगठित अपराध के रूप में लिया है।
फर्जी कंपनी के जरिए चल रहा था पूरा खेल
साइबर क्राइम टीम की जांच में सामने आया कि आरोपी एक डमी कंपनी के नाम पर पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था। इस कंपनी के जरिए अलग-अलग लोगों के बैंक खातों को नियंत्रित किया जाता था और इन्हीं खातों में संदिग्ध लेनदेन किए जाते थे।
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जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में कम से कम नौ बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ, जिनके जरिए ₹60 करोड़ से अधिक की राशि का ट्रांजैक्शन किया गया। यह रकम विभिन्न साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ी होने की आशंका है।
देशभर से जुड़ी 46 शिकायतें
अधिकारियों ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर देशभर से 46 शिकायतें दर्ज हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय था।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी अलग-अलग राज्यों के लोगों के खातों का इस्तेमाल कर पैसे को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करता था, जिससे असली स्रोत और गंतव्य को छुपाया जा सके।
क्या होता है ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क
साइबर अपराध में ‘म्यूल अकाउंट’ उन बैंक खातों को कहा जाता है, जिन्हें अपराधी दूसरों के नाम पर खुलवाकर या उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर संचालित करते हैं। इन खातों का उपयोग अवैध रूप से प्राप्त धन को ट्रांसफर करने, छुपाने और निकालने के लिए किया जाता है।
इस मामले में भी आरोपी ने इसी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे के असली स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
गिरफ्तारी के दौरान मिले अहम सबूत
साइबर क्राइम टीम ने कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में बैंकिंग और डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें कई चेकबुक, पासबुक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, जीएसटी से जुड़े कागजात, कंपनी के दस्तावेज, एक महंगा मोबाइल फोन और दो लैपटॉप शामिल हैं।
इन बरामद सामग्रियों से यह साफ संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क तकनीकी रूप से संगठित और व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा था। अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर और जानकारी जुटाई जा रही है।
साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क होने की आशंका
अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है। ऐसे नेटवर्क आमतौर पर कई स्तरों पर काम करते हैं, जहां अलग-अलग लोग बैंक खाते उपलब्ध कराने, ट्रांजैक्शन करने और पैसे निकालने का काम करते हैं।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं, ताकि अन्य आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोग अनजाने में भी ऐसे अपराधों का हिस्सा बन सकते हैं, यदि वे अपने बैंक खाते या दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए दे देते हैं। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था को बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल इस मामले में साइबर क्राइम थाना में केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी हैं।
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि साइबर अपराध अब कितने संगठित और बड़े स्तर पर हो रहे हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
