नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गुरुवार को एक बड़ा विमानन हादसा होते-होते टल गया, जब टैक्सी करते हुए स्पाइसजेट के एक विमान की अकासा एयर के खड़े विमान से टक्कर हो गई। यह घटना एयरपोर्ट के ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान हुई, जिससे विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, स्पाइसजेट का B737-700 विमान टैक्सी करते समय नियंत्रण क्षेत्र में आगे बढ़ रहा था, तभी उसकी दूसरे विमान से टक्कर हो गई जो उस समय खड़ा हुआ था। टक्कर के बाद दोनों विमानों को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी यात्री या क्रू मेंबर के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
स्पाइसजेट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एक ग्राउंड इन्सिडेंट के दौरान उनके विमान का संपर्क दूसरे विमान से हो गया, जिसके कारण विमान के दाहिने विंगलेट और दूसरे विमान के बाएं हिस्से को नुकसान पहुंचा। घटना के बाद प्रभावित विमान को तत्काल ग्राउंडेड कर दिया गया और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है।
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वहीं अकासा एयर ने भी अलग बयान जारी कर घटना की पुष्टि की, हालांकि कंपनी ने सीधे तौर पर दूसरी एयरलाइन का नाम नहीं लिया। अकासा एयर ने कहा कि उसकी एक फ्लाइट, जो दिल्ली से हैदराबाद जा रही थी, को घटना के बाद वापस बे में लाना पड़ा क्योंकि विमान उस समय स्थिर अवस्था में था और दूसरे विमान की टक्कर के कारण उसे नुकसान पहुंचा।
एयरलाइन ने बताया कि सभी यात्रियों और क्रू को सुरक्षित रूप से विमान से उतार लिया गया है और यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है और तकनीकी टीम घटना की जांच में जुटी है।
हवाई अड्डा प्राधिकरण की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह घटना टैक्सीवे पर हुई, जहां विमानों की आवाजाही नियंत्रित गति से होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में मामूली चूक भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है।
विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राउंड कोलिजन की घटनाएं बेहद गंभीर मानी जाती हैं क्योंकि इनमें विमान की संरचना को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ परिचालन सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। इस घटना के बाद दोनों विमानों की तकनीकी जांच अनिवार्य कर दी गई है।
घटना के बाद एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए ग्राउंड मूवमेंट प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई है, हालांकि उड़ान संचालन को बड़े स्तर पर बाधित नहीं बताया गया है। यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए एयरलाइंस ने वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था शुरू कर दी है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश में हवाई यातायात तेजी से बढ़ रहा है और एयरपोर्ट्स पर ग्राउंड हैंडलिंग को और मजबूत करने की मांग उठ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल और ग्राउंड ऑपरेशन के बीच बेहतर समन्वय इस तरह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल दोनों एयरलाइंस की तकनीकी टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं और विमान संचालन की सुरक्षा जांच के बाद ही प्रभावित विमानों को सेवा में लौटाया जाएगा। मामले की विस्तृत जांच की संभावना भी जताई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर भारतीय विमानन उद्योग में ग्राउंड सेफ्टी प्रोटोकॉल की समीक्षा की जरूरत को उजागर कर दिया है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए सभी संबंधित एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और आगे की कार्रवाई पर नजर रखी जा रही है।
