दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में हुए कथित ₹650 करोड़ के घोटाले की जांच अब व्यापक स्तर पर पहुंच गई है। तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए वरिष्ठ नौकरशाहों, डॉक्टरों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में कथित ₹650 करोड़ के खरीद घोटाले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, खरीद प्रक्रिया से जुड़े करीब 100 डॉक्टर, अधिकारी और कर्मचारी जांच के दायरे में आ चुके हैं।
जांच एजेंसियां मामले की दो स्तरों पर पड़ताल कर रही हैं। पहले स्तर पर स्वास्थ्य विभाग में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों, खरीद संबंधी मंजूरियों और उस अवधि के दौरान महत्वपूर्ण पदों पर तैनात वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। दूसरे स्तर पर केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस), डॉक्टरों और दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
अब तक इस मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. वत्सला अग्रवाल, तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा, जिन्हें 19 जून को गिरफ्तार किया गया था, तथा तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर (फाइनेंस एंड अकाउंट्स) नीरज चोपड़ा शामिल हैं। डॉ. वत्सला अग्रवाल और नीरज चोपड़ा को पूछताछ के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेजा गया।
मामले के वित्तीय पहलू की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है। एसीबी की एफआईआर के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियां कथित मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर आरोपियों से आगे भी पूछताछ की जाएगी। यह मामला 4 जून को दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा जितनी दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की मांग भेजी गई थी, क्या केंद्रीय खरीद एजेंसी ने उसी अनुरूप खरीद की थी। इसके लिए मांग पत्र, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड और खरीद से संबंधित फाइलों का मिलान किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान खरीद प्रक्रिया से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मूल फाइलें और दस्तावेज गायब पाए गए हैं। गिरफ्तार अधिकारियों से गायब रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं सबूतों से छेड़छाड़ या उन्हें जानबूझकर गायब तो नहीं किया गया।
जांच से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने खरीद व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर अपने पसंदीदा अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती कराई थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इन नियुक्तियों के जरिए निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और कथित रूप से कमीशनखोरी का नेटवर्क संचालित किया गया।
अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर एसीबी जल्द ही स्वास्थ्य विभाग में तैनात रहे कम से कम पांच से सात आईएएस अधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। जांच को प्रभावित होने से रोकने के लिए विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों का पहले ही तबादला किया जा चुका है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और कथित खरीद अनियमितताओं, वित्तीय लेनदेन तथा प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
