निवेश के नाम पर सबसे ज्यादा नुकसान, AI और फर्जी रिकवरी गिरोहों ने बढ़ाई चुनौती; बुजुर्ग बने सबसे बड़े शिकार

₹91 लाख करोड़ की साइबर ठगी: क्रिप्टो स्कैम ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

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By Roopa
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डिजिटल युग में बढ़ती ऑनलाइन ठगी के बीच 2025 में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े स्कैम ने अभूतपूर्व स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। Federal Bureau of Investigation की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में दर्ज कुल साइबर फ्रॉड में सबसे बड़ा हिस्सा क्रिप्टो स्कैम का रहा, जिसमें निवेशकों को करीब ₹91 लाख करोड़ (लगभग 11 अरब डॉलर) की चपत लगी। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 22 प्रतिशत अधिक है, जो तेजी से बढ़ते साइबर अपराध का संकेत देता है।

रिपोर्ट के अनुसार, Internet Crime Complaint Center को 2025 में 1.8 लाख से अधिक क्रिप्टो फ्रॉड शिकायतें प्राप्त हुईं। कुल मिलाकर, इंटरनेट अपराध से जुड़ी शिकायतों की संख्या 10 लाख के पार पहुंच गई, जो एक दशक पहले के आंकड़ों से कई गुना अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों को नए अवसर मिल रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि मामलों की संख्या के लिहाज से फिशिंग और स्पूफिंग सबसे आम अपराध रहे, लेकिन नुकसान के मामले में निवेश से जुड़े स्कैम सबसे आगे रहे। निवेश धोखाधड़ी में करीब ₹71 लाख करोड़ (8.6 अरब डॉलर) का नुकसान दर्ज किया गया, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक मामलों में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल हुआ। ठग आमतौर पर लोगों को उच्च रिटर्न का लालच देकर लंबे समय तक विश्वास में लेते हैं और फिर बड़ी रकम हड़प लेते हैं।

रिपोर्ट में “रिकवरी स्कैम” के बढ़ते खतरे की भी चेतावनी दी गई है। इसमें पहले से ठगी का शिकार हो चुके लोगों को फिर से निशाना बनाया जाता है। ठग खुद को वकील, सरकारी अधिकारी या साइबर विशेषज्ञ बताकर दावा करते हैं कि वे फंसा हुआ पैसा वापस दिला सकते हैं। 2025 में ऐसे 10,500 से अधिक मामले सामने आए, जिनमें करीब ₹11,500 करोड़ (1.4 अरब डॉलर) की अतिरिक्त ठगी हुई।

साइबर अपराध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 22,000 से अधिक शिकायतों में AI के इस्तेमाल का जिक्र मिला, जिनमें कुल नुकसान ₹7,400 करोड़ (893 मिलियन डॉलर) से अधिक रहा। ठग AI की मदद से फर्जी वीडियो, ऑडियो और चैट तैयार कर रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी को पहचानना मुश्किल होता जा रहा है।

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AI आधारित स्कैम में अपराधी अब मशहूर हस्तियों, कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों या भरोसेमंद व्यक्तियों की नकली पहचान बनाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करते हैं। सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के जरिए ये स्कैम बेहद वास्तविक प्रतीत होते हैं, जिससे आम लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग इस तरह के फ्रॉड में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इस वर्ग के 2 लाख से अधिक लोगों ने शिकायत दर्ज कराई, जिनका कुल नुकसान ₹64 लाख करोड़ से ज्यादा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों में डिजिटल जागरूकता की कमी और भरोसे की प्रवृत्ति के कारण वे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

इसके अलावा, बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज, टेक सपोर्ट स्कैम और एक्सटॉर्शन जैसे अन्य साइबर अपराध भी बड़े स्तर पर सामने आए। बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज से करीब ₹25,000 करोड़ (3 अरब डॉलर) और टेक सपोर्ट स्कैम से ₹17,000 करोड़ (2.1 अरब डॉलर) का नुकसान दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान और क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के तौर-तरीके लगातार बदल रहे हैं। खासतौर पर AI तकनीक ने इन अपराधों को अधिक परिष्कृत और खतरनाक बना दिया है।

रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में क्रिप्टो स्कैम और साइबर फ्रॉड के मामलों में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल, अनजान लिंक से दूरी और डिजिटल सतर्कता ही सबसे प्रभावी बचाव के उपाय माने जा रहे हैं।

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