नई दिल्ली/वॉशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी साइबर सुरक्षा चुनौतियों को लेकर वैश्विक वित्तीय और तकनीकी जगत में गंभीर चिंता का माहौल बन गया है। Anthropic के नए AI मॉडल “Claude Mythos Preview” को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद अमेरिका में शीर्ष वित्तीय संस्थानों और नियामक एजेंसियों के बीच आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें संभावित साइबर जोखिमों और आर्थिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और फेडरल रिजर्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने देश के प्रमुख बैंकिंग अधिकारियों को अचानक एक उच्च स्तरीय बैठक के लिए आमंत्रित किया। इस बैठक में बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और वेल्स फार्गो जैसे बड़े वित्तीय संस्थानों के सीईओ शामिल हुए। बैठक का फोकस पारंपरिक आर्थिक नीतियों से हटकर AI आधारित साइबर सुरक्षा जोखिमों पर केंद्रित रहा।
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रिपोर्टों में दावा किया गया है कि Anthropic का नया मॉडल Claude Mythos Preview अत्याधुनिक क्षमता से लैस है, जो सॉफ्टवेयर सिस्टम में छिपी कमजोरियों की पहचान करने और उन्हें एक्सप्लॉइट करने में सक्षम है। बताया जा रहा है कि इस मॉडल ने विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में हजारों ऐसी कमजोरियां खोजी हैं, जो वर्षों से अनदेखी थीं।
एक उदाहरण में सामने आया कि OpenBSD जैसे अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले सिस्टम में 27 वर्षों से मौजूद एक गंभीर खामी को इस मॉडल ने चिन्हित किया। इसी तरह FFmpeg जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले वीडियो प्रोसेसिंग टूल में भी ऐसी कमजोरी पाई गई, जिसे करोड़ों ऑटोमेटेड टेस्टिंग प्रक्रियाएं भी पकड़ नहीं सकीं।
इसी बीच Anthropic ने “Project Glasswing” नाम से एक बड़ा साइबर सुरक्षा सहयोग कार्यक्रम भी शुरू किया है। इस पहल में Amazon, Apple, Google, Microsoft और JPMorgan Chase जैसी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य AI तकनीक का उपयोग कर सिस्टम की कमजोरियों को पहले ही पहचानकर उन्हें ठीक करना बताया गया है, ताकि साइबर अपराधियों द्वारा इनका दुरुपयोग न किया जा सके।
कंपनी ने इस पहल के लिए लगभग 100 मिलियन डॉलर के उपयोग संसाधन और 4 मिलियन डॉलर ओपन-सोर्स सुरक्षा परियोजनाओं के लिए आवंटित किए हैं। हालांकि, Anthropic ने यह स्पष्ट किया है कि Claude Mythos Preview को सार्वजनिक उपयोग के लिए जारी करने की कोई योजना नहीं है।
वित्तीय बाजारों पर इस विकास का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। विश्लेषकों के अनुसार, AI आधारित तकनीकी बदलावों के चलते वैश्विक आईटी और सॉफ्टवेयर सेक्टर में करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट को बाजार विशेषज्ञ “SaaSpocalypse” नाम दे रहे हैं, जिसमें पारंपरिक सॉफ्टवेयर बिजनेस मॉडल पर गंभीर दबाव देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI एजेंट बड़े पैमाने पर मानव कार्यों को प्रतिस्थापित करते हैं, तो एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और लाइसेंसिंग मॉडल पूरी तरह बदल सकते हैं, जिससे वैश्विक टेक उद्योग की संरचना प्रभावित होगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि AI तकनीक जितनी लाभकारी है, उतनी ही जोखिमपूर्ण भी साबित हो सकती है। उनके अनुसार, “एडवांस AI मॉडल अब केवल सुरक्षा उपकरण नहीं रहे, बल्कि वे सिस्टम की कमजोरियों को खोजकर उनका दुरुपयोग करने की क्षमता भी रखते हैं, जिससे साइबर अपराध का स्वरूप और अधिक जटिल हो जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में साइबर सुरक्षा एजेंसियों को AI आधारित हमलों के लिए विशेष रणनीतियां विकसित करनी होंगी, क्योंकि पारंपरिक सुरक्षा प्रणाली इन तकनीकों के सामने कमजोर साबित हो सकती हैं।
फिलहाल अमेरिकी वित्त विभाग, फेडरल रिजर्व और प्रमुख बैंकिंग संस्थान इस पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि AI से जुड़े जोखिमों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नियमन बेहद जरूरी है, ताकि वैश्विक वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित रखा जा सके।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत देता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीकी प्रगति का साधन नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा नीतियों को प्रभावित करने वाला एक निर्णायक कारक बन चुका है, जिस पर सख्त निगरानी और संतुलित नियंत्रण की आवश्यकता है।
