पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका पर संभावित ईरानी साइबर हमलों का खतरा गहराता जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन हमलों की नई लहर कभी भी शुरू हो सकती है। ऐसे समय में अमेरिका की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी Cybersecurity and Infrastructure Security Agency (CISA) संसाधनों की कमी, आंशिक सरकारी शटडाउन और नेतृत्व में बदलाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
CISA की आंतरिक चुनौतियां
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल की हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बाद ईरान समर्थित हैकर समूह अमेरिकी कंपनियों, बैंकों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं। साइबर सुरक्षा स्टार्टअप Tenzai के सीईओ पावेल गुरविच ने चेतावनी दी कि “टाइमिंग के लिहाज से यह ‘अब या कभी नहीं’ जैसा पल हो सकता है,” और खतरा पहले से कहीं अधिक गंभीर है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की प्रमुख Kristi Noem ने कहा है कि विभाग संघीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर संभावित खतरों की करीबी निगरानी कर रहा है। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार CISA ने हाल के महीनों में अपने लगभग एक-तिहाई कर्मचारियों को खो दिया है। अस्थायी निदेशक मदहु गोट्टुमुक्कला का हाल ही में तबादला कर दिया गया, जबकि मुख्य सूचना अधिकारी बॉब कॉस्टेलो ने पद छोड़ने की घोषणा की है।
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शटडाउन का असर
आंशिक फंडिंग लैप्स के कारण एजेंसी की वेबसाइट 17 फरवरी के बाद अपडेट नहीं हुई है। कई साइबर सुरक्षा आकलन और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं। सांसदों ने पहले ही चेताया था कि शटडाउन की स्थिति देश की महत्वपूर्ण संरचनाओं और अस्पतालों की सुरक्षा क्षमता को कमजोर कर सकती है।
निजी क्षेत्र की सतर्कता
साइबर खतरों की गंभीरता को देखते हुए निजी क्षेत्र भी सतर्क है। CrowdStrike ने ईरान-समर्थित समूहों की ओर से नेटवर्क और सर्वर बाधित करने के दावों में वृद्धि देखी है। Google के थ्रेट इंटेलिजेंस विश्लेषकों का कहना है कि भले ही ईरान अक्सर हमलों के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता रहा हो, लेकिन संभावित हमले व्यवसायों पर गंभीर असर डाल सकते हैं। बैंकिंग क्षेत्र भी हाई अलर्ट पर है। JPMorgan Chase के सीईओ Jamie Dimon ने माना कि साइबर हमले बैंकों के सामने सबसे बड़े जोखिमों में से एक हैं और वैश्विक स्तर पर साइबर या आतंकी हमलों में वृद्धि की आशंका है।
ईरान का साइबर इतिहास
ईरान का साइबर ट्रैक रिकॉर्ड पहले भी अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। 2012-13 में बड़े अमेरिकी बैंकों पर डिनायल-ऑफ-सर्विस हमलों से वेबसाइटें ठप हो गई थीं। 2024 में ईरान से जुड़े हैकर समूहों ने अमेरिकी राजनीतिक अभियानों से जुड़े ईमेल हैक करने का दावा किया था।
भविष्य की आशंकाएं
विश्लेषकों का मानना है कि मौजदा परिदृश्य एक “परिचित पैटर्न” का अनुसरण कर रहा है—भौतिक संघर्ष के समानांतर साइबर हमलों की संभावना। अमेरिका, इजराइल और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के महत्वपूर्ण ढांचे और अवसरवादी लक्ष्यों पर हमले की आशंका जताई जा रही है। तेजी से बदलते इस भू-राजनीतिक माहौल में साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्कता और समन्वय निर्णायक भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच रियल-टाइम सूचना साझाकरण और तैयारी ही संभावित साइबर हमलों के प्रभाव को सीमित कर सकती है।
