साइबर ठगों को किराए पर दिए गए खाते, तीन ट्रांजैक्शन में हुआ खेल; ‘म्यूल हंटर’ अभियान में दो आरोपियों पर केस दर्ज

कमीशन के लालच में म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश: चित्तौड़गढ़ में बैंक खातों के जरिए ₹21.90 लाख का साइबर लेनदेन उजागर

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By Roopa
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चित्तौड़गढ़ जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने बैंक खातों को किराए पर देकर साइबर ठगों को अवैध लेनदेन में मदद करने वाले एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया कि दो आरोपियों के खातों में तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹21 लाख 90 हजार की संदिग्ध राशि जमा की गई, जिसे बाद में निकालकर आगे पहुंचाया गया। इस कार्रवाई के बाद साइबर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। यह पूरी कार्रवाई ‘म्यूल हंटर’ अभियान के तहत की गई, जिसका उद्देश्य ऐसे बैंक खाताधारकों की पहचान करना है जो लालच या कमीशन के बदले अपने खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने देते हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि जिस एसबीआई खाते का इस्तेमाल किया गया, वह पहले से ही साइबर क्राइम पोर्टल पर संदिग्ध गतिविधियों के लिए चिन्हित था। इस खाते से जुड़े मामलों की पड़ताल करने पर पता चला कि महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवड़, पुणे और तमिलनाडु के चेन्नई जैसे राज्यों में साइबर ठगी की कई शिकायतें दर्ज हैं। अलग-अलग तारीखों में दर्ज शिकायतों में ₹5.80 लाख, ₹14 लाख और ₹2.10 लाख की धोखाधड़ी के मामले सामने आए, जो सीधे इसी खाते से जुड़े थे। इन सभी मामलों को जोड़ने पर कुल ₹21.90 लाख का अवैध लेनदेन सामने आया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि एक संगठित नेटवर्क इस खाते का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए कर रहा था।

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पुलिस पूछताछ में खाताधारक बालूराम पुत्र कन्हैयालाल ने खुलासा किया कि उसे उसके परिचित श्रवण सुहालका ने इस काम के लिए तैयार किया था। दोनों पहले पास-पास दुकान चलाते थे, जिसके चलते उनकी जान-पहचान थी। बालूराम ने बताया कि उसे लालच दिया गया कि उसके खाते में आने वाली अवैध रकम पर 30 प्रतिशत कमीशन मिलेगा, जिसमें से 20 प्रतिशत उसे और 10 प्रतिशत उसके साथी को दिया जाएगा। इसके बाद तीन ट्रांजैक्शन में रकम खाते में आई, जिसे बैंक से चेक के जरिए निकाल लिया गया और आपसी सहमति से बांट दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ने पहले से योजना बनाकर यह पूरा फर्जीवाड़ा अंजाम दिया और साइबर ठगी की रकम को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि म्यूल अकाउंट सिस्टम आज साइबर ठगों की सबसे मजबूत कड़ी बन चुका है। उनके अनुसार, “आज साइबर अपराधी केवल तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि सामाजिक इंजीनियरिंग के जरिए आम नागरिकों को लालच देकर अपने नेटवर्क का हिस्सा बना रहे हैं। जब तक बैंकिंग सिस्टम में केवाईसी और निगरानी प्रक्रिया को और सख्त नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे संगठित नेटवर्क पूरी तरह खत्म करना मुश्किल रहेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में राज्यों के बीच रियल टाइम सूचना साझा करना बेहद जरूरी है, ताकि अपराधियों की गतिविधियों को तुरंत रोका जा सके।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और साइबर फ्रॉड से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और कितने बैंक खातों का इस्तेमाल इसी तरह की गतिविधियों में किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल चित्तौड़गढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस सिंडिकेट की परतें खुलती जा रही हैं।

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