चेन्नई में नकली सोने के आभूषणों को असली बताकर गोल्ड लोन हासिल करने और एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को ₹63.39 लाख का चूना लगाने वाले संगठित धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बैंक से संबद्ध पांच अधिकृत गोल्ड अप्रेज़र भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
यह मामला बैंक फ्रॉड जांच शाखा में दर्ज शिकायत के आधार पर सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ उधारकर्ताओं ने बैंक के पैनल में शामिल गोल्ड अप्रेज़रों के साथ कथित मिलीभगत कर नकली सोने के गहनों को असली बताकर गोल्ड लोन हासिल किया। बाद में आरोपियों ने ऋण की अदायगी नहीं की, जिससे बैंक को ₹63.39 लाख का वित्तीय नुकसान हुआ।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी आभूषणों को वास्तविक सोना बताकर उनकी गलत कीमत निर्धारित कराई। इसी आधार पर कुल 22 गोल्ड लोन स्वीकृत कराए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया कथित साजिश के तहत अंजाम दी गई, जिसमें कई लोगों की भूमिका सामने आई है।
जांच के दौरान सबसे पहले 29 जून को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान 44 वर्षीय भूमिनाथन, उनकी 42 वर्षीय पत्नी रीगाम्बिगई और 44 वर्षीय नागलक्ष्मी के रूप में हुई। तीनों चेन्नई के अन्ना नगर ईस्ट क्षेत्र के निवासी हैं। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई, जिसके बाद बैंक से जुड़े गोल्ड अप्रेज़रों की कथित संलिप्तता का पता चला।
इसके बाद पांच अधिकृत गोल्ड अप्रेज़रों को गिरफ्तार किया गया। जांच में आरोप है कि इन्होंने नकली आभूषणों को असली बताते हुए उनका मूल्यांकन किया, जिसके आधार पर बैंक ने ऋण स्वीकृत कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि मूल्यांकन सही तरीके से किया जाता तो कथित धोखाधड़ी को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता था।
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था तथा क्या इसी तरह की धोखाधड़ी अन्य बैंक शाखाओं में भी की गई है।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि फर्जी आभूषणों का इस्तेमाल कर बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग करने की यह योजना पहले से तैयार की गई थी। जांच अधिकारी अब गोल्ड लोन से जुड़े दस्तावेजों, मूल्यांकन रिपोर्टों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की विस्तार से जांच कर रहे हैं ताकि पूरे षड्यंत्र का खुलासा किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि गोल्ड लोन धोखाधड़ी के मामलों में केवल तकनीकी सत्यापन ही नहीं, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी और नियमित ऑडिट भी बेहद आवश्यक है। Future Crime Research Foundation का मानना है कि वित्तीय संस्थानों को गोल्ड अप्रेज़रों के सत्यापन, जोखिम आधारित ऑडिट और डिजिटल रिकॉर्ड विश्लेषण को मजबूत करना चाहिए ताकि इस प्रकार की संगठित वित्तीय धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सके।
फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस धोखाधड़ी से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका क्या थी और बैंक को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
