चंडीगढ़ में फर्जी क्रिप्टो निवेश प्लेटफॉर्म से ₹33 लाख की ठगी के मामले में राजस्थान से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच का प्रतीकात्मक दृश्य।

Crypto फ्रॉड का पर्दाफाश: फर्जी प्लेटफॉर्म से निवेशक को लगाया ₹33 लाख का चूना, राजस्थान से गिरफ्तारी

Team The420
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चंडीगढ़ में क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसमें एक शहर निवासी से करीब $40,000 (लगभग ₹33 लाख) की ठगी कर ली गई। इस मामले में साइबर अपराध शाखा ने राजस्थान के झुंझुनू जिले के रहने वाले 29 वर्षीय युवक जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को झांसा देकर रकम हड़पने का आरोप है। यह कार्रवाई 14 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई।

मामले की शुरुआत चंडीगढ़ के सेक्टर-44 निवासी नरेंद्र अहलावत की शिकायत से हुई, जो एक डिजिटल प्लेटफॉर्म “Track With Market” का संचालन करते हैं। शिकायत के अनुसार, अक्टूबर से नवंबर 2025 के बीच उन्हें कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने संपर्क किया और खुद को TRD-NFT नामक कथित अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताया। बातचीत के दौरान उन्हें क्रिप्टो ट्रेडिंग में बेहद आकर्षक और गारंटीड हाई रिटर्न का लालच दिया गया।

शुरुआती चरण में आरोपियों ने निवेशक का भरोसा जीतने के लिए छोटे-छोटे लाभ दिखाए। फर्जी प्लेटफॉर्म पर वर्चुअल प्रॉफिट दिखाकर यह भ्रम पैदा किया गया कि निवेश सुरक्षित और लाभदायक है। इसके बाद धीरे-धीरे अधिक रकम निवेश कराने का दबाव बनाया गया। पीड़ित ने भरोसे में आकर कई ट्रांजैक्शन कर दिए, जिससे कुल रकम करीब ₹33 लाख तक पहुंच गई।

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जब शिकायतकर्ता ने अपनी राशि निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने विभिन्न बहानों का सहारा लिया। कभी तकनीकी समस्या, कभी टैक्स और कभी प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई। लगातार दबाव और बाधाओं के बाद अचानक पूरा नेटवर्क संपर्क से बाहर हो गया और निवेश की गई रकम वापस नहीं मिली।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर अपराध शाखा ने डिजिटल ट्रांजैक्शन, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर टीम राजस्थान के झुंझुनू पहुंची, जहां से आरोपी जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह संगठित तरीके से फर्जी क्रिप्टो निवेश प्लेटफॉर्म तैयार करता था और देशभर में लोगों को निशाना बनाता था। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए संभावित निवेशकों से संपर्क किया जाता था और उन्हें फर्जी वेबसाइट व डैशबोर्ड के जरिए वास्तविक निवेश जैसा अनुभव कराया जाता था।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे गिरोह “डिजिटल विश्वास” का फायदा उठाते हैं। पहले छोटे मुनाफे दिखाकर भरोसा बनाया जाता है और फिर बड़ी रकम निवेश कराई जाती है। एक बार पैसा ट्रांसफर होने के बाद पूरा नेटवर्क अचानक गायब हो जाता है, जिससे रिकवरी लगभग असंभव हो जाती है।

इस तरह की घटनाओं पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना सत्यापन वाले किसी भी क्रिप्टो या ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर भरोसा करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। लालच और जल्दबाजी अक्सर लोगों को बड़े वित्तीय नुकसान की ओर ले जाती है।

वर्तमान मामले में ठगी की गई राशि $40,000 है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग ₹33 लाख के आसपास बैठती है। यह रकम पीड़ित के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हुई है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इसका संचालन किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच यह घटना एक बार फिर यह स्पष्ट करती है कि डिजिटल निवेश में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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