“फर्जी नोटिस और नकली गिरफ्तारी कॉल पर रोक की बड़ी पहल; AI चैटबॉट से नागरिक खुद कर सकेंगे सत्यापन, साइबर ठगों में मचा हड़कंप”

“डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर टेक अटैक: CBI का ‘Abhay’ बनेगा आम लोगों का नया साइबर सुरक्षा कवच”

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट और फर्जी सरकारी नोटिस आधारित साइबर फ्रॉड के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। एजेंसी द्वारा ‘Abhay’ नामक AI चैटबॉट लॉन्च किया जा रहा है, जो नागरिकों को किसी भी संदिग्ध नोटिस की तुरंत सत्यता जांच करने की सुविधा देगा।

इस पहल का उद्देश्य उन संगठित साइबर गिरोहों पर लगाम लगाना है जो खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और डिजिटल हिरासत में लेने की धमकी देकर लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी करते हैं।

CBI के अनुसार, कई मामलों में अपराधी फर्जी गिरफ्तारी वारंट, नकली समन और एडिटेड दस्तावेजों का उपयोग कर पीड़ितों को मानसिक दबाव में लेते हैं। पीड़ितों को घंटों तक वीडियो कॉल पर रखा जाता है और उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे किसी गंभीर जांच के दायरे में हैं।

‘Abhay’ चैटबॉट को इस तरह विकसित किया गया है कि उपयोगकर्ता केवल नोटिस नंबर या संबंधित जानकारी दर्ज कर उसकी वैधता तुरंत जांच सकते हैं। यह सिस्टम CBI के आधिकारिक डेटाबेस से डेटा मिलान कर वास्तविक और फर्जी दस्तावेजों की पहचान करेगा।

इस चैटबॉट का औपचारिक लॉन्च 22वें डी.पी. कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान किया जाएगा, जहां साइबर अपराध, न्यायिक प्रक्रिया और आधुनिक जांच तकनीकों पर चर्चा होगी। इस कार्यक्रम को देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

साइबर अपराधों में बढ़ोतरी को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आम लोगों के लिए डिजिटल सुरक्षा कवच का काम करेगी और फर्जीवाड़े की घटनाओं को काफी हद तक कम कर सकती है।

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“डिजिटल अरेस्ट स्कैम अब एक मनोवैज्ञानिक और तकनीकी दोनों स्तर का अपराध बन चुका है। अपराधी लोगों के डर और तकनीकी भ्रम का फायदा उठाकर उन्हें फंसाते हैं। ऐसे में AI आधारित सत्यापन प्रणाली समय की सबसे बड़ी जरूरत है,” कहा renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh ने।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों में साइबर ठगी के मामलों में तेज वृद्धि हुई है। खासकर ऐसे मामलों में जहां अपराधी सरकारी एजेंसियों की नकली पहचान बनाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। इससे आम नागरिकों में भ्रम और भय का माहौल बनता है।

CBI का कहना है कि भविष्य में ‘Abhay’ को अन्य डिजिटल सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है, ताकि नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर विभिन्न प्रकार के सत्यापन कार्य कर सकें। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि साइबर अपराधों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत में साइबर सुरक्षा ढांचे को नई दिशा दे सकती है। AI आधारित यह सिस्टम ठगों की रणनीतियों को कमजोर करेगा और लोगों को डिजिटल रूप से अधिक जागरूक बनाएगा।

कुल मिलाकर यह कदम साइबर अपराध के खिलाफ सरकार की बढ़ती सख्ती और तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, जो भविष्य में डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

इस पहल को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में ऐसे AI टूल्स को बैंकिंग, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे किसी भी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि की तुरंत पहचान संभव हो सकेगी। इससे न केवल ठगी की घटनाएं कम होंगी बल्कि आम नागरिकों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू किया गया तो यह भारत को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है। साथ ही, इससे जागरूकता बढ़ने के कारण लोग संदिग्ध कॉल और संदेशों को पहचानने में अधिक सतर्क होंगे और साइबर अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी।

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