तमिलनाडु के थेनी जिले में कैनरा बैंक की दो शाखाओं में कथित ₹14 करोड़ SHG लोन घोटाले के मामले में पूर्व शाखा प्रबंधक समेत 10 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है।

₹14 करोड़ SHG लोन घोटाला: कैनरा बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक समेत 10 कर्मचारी बर्खास्त, फर्जी दस्तावेजों से महिला समूहों के नाम पर निकाले गए ऋण

Team The420
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तमिलनाडु के थेनी जिले में कैनरा बैंक की दो शाखाओं में सामने आए करीब ₹14 करोड़ के कथित स्वयं सहायता समूह (SHG) ऋण घोटाले के मामले में बैंक ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व शाखा प्रबंधक कार्तिक सहित कुल 10 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार कर महिला स्वयं सहायता समूहों और स्वरोजगार योजनाओं के नाम पर ऋण स्वीकृत कराने तथा धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। पुलिस ने बैंक की शिकायत पर विस्तृत आपराधिक जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, घोटाले का मुख्य आरोपी कार्तिक थेनी जिले की ओडैपट्टी और कूलायनूर शाखाओं में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्य कर चुका था। बैंक के आंतरिक ऑडिट में सबसे पहले ओडैपट्टी शाखा में लगभग ₹12 करोड़ की अनधिकृत वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच का दायरा बढ़ाया तो कूलायनूर शाखा में भी इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाकर करीब ₹2 करोड़ की अतिरिक्त गड़बड़ी का पता चला।

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बैंक की आंतरिक जांच में आरोप है कि कार्तिक ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए, नकली लाभार्थी प्रोफाइल बनाए और महिला स्वयं सहायता समूहों व स्वरोजगार योजनाओं के लिए निर्धारित रिवॉल्विंग फंड तथा ऋणों को नियमों के विपरीत स्वीकृत कराया। इस प्रक्रिया में कई ऋण खाते वास्तविक लाभार्थियों के बजाय कथित रूप से फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर संचालित किए गए।

जांच के दौरान बैंक अधिकारियों को इस मामले में व्यापक मिलीभगत की आशंका हुई। इसके बाद रिकॉर्ड की गहन पड़ताल में नौ अन्य कर्मचारियों की कथित संलिप्तता सामने आने का दावा किया गया। बैंक ने सभी संबंधित 10 कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूरी करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।

मामले को लेकर कैनरा बैंक की क्षेत्रीय प्रबंधक इंदिरा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच एजेंसियां बैंक के वित्तीय रिकॉर्ड, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, लाभार्थियों के दस्तावेज तथा लेन-देन के विवरण की जांच कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि धोखाधड़ी की वास्तविक राशि कितनी है और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित फर्जी ऋण खातों का असर बैंक के वास्तविक ग्राहकों पर किस हद तक पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित शाखाओं के ग्राहकों में बड़ी संख्या में किसान, छोटे व्यापारी और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग शामिल हैं। इसलिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वैध खाताधारकों को किसी प्रकार की वित्तीय हानि या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में होने वाली इस प्रकार की संगठित धोखाधड़ी केवल दस्तावेजों की जालसाजी तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें आंतरिक नियंत्रण प्रणाली, डिजिटल रिकॉर्ड, पहचान सत्यापन और ऑडिट प्रक्रिया की कमजोरियों का भी लाभ उठाया जाता है। उनके अनुसार, समय-समय पर डेटा एनालिटिक्स आधारित ऑडिट, कर्मचारियों की जवाबदेही और तकनीकी निगरानी को मजबूत किए बिना ऐसे वित्तीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना कठिन है।

फिलहाल पुलिस और बैंक दोनों स्तरों पर जांच जारी है। जांच के आधार पर आगे आपराधिक कार्रवाई, धन की वसूली तथा यदि आवश्यक हुआ तो अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। बैंक ने संकेत दिया है कि मामले में किसी भी दोषी व्यक्ति के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी।

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