सीमा सड़क संगठन (BRO) के फंड में कथित करोड़ों रुपये के गबन के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में BRO, लद्दाख का एक सहायक अभियंता (सिविल) तथा कारगिल के दो श्रमिक आपूर्ति एजेंट शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि तीनों ने कथित साजिश के तहत फर्जी मजदूरों के नाम पर सरकारी धन निकालकर उसका दुरुपयोग किया।
CBI के अनुसार, मामला रक्षा मंत्रालय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच में आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तार सहायक अभियंता लद्दाख में 81 RCC, BRO के तहत खालत्से-बटालिक सेक्टर का प्रभारी अधिकारी था। एजेंसी का दावा है कि उसने दो श्रमिक आपूर्ति एजेंटों के साथ मिलकर कथित रूप से ऐसे श्रमिकों के नाम पर रिकॉर्ड तैयार किए, जिन्होंने वास्तव में कोई काम नहीं किया था। इन कथित “घोस्ट लेबर” के वेतन और अन्य भत्तों के नाम पर सरकारी धन निकाला गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी राशि निकालने के बाद श्रमिक आपूर्ति एजेंटों ने कथित रूप से इस धन का एक हिस्सा सहायक अभियंता के निजी बैंक खाते में स्थानांतरित किया। CBI वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर कथित धन प्रवाह का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
यह मामला BRO की विभिन्न परियोजनाओं में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी व्यापक जांच का हिस्सा है। CBI अब तक इस प्रकरण में चार अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज कर चुकी है। जांच के दौरान देश के 26 स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया, जहां से एजेंसी के अनुसार कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए। हाल ही में हिमाचल प्रदेश में भी एक अन्य तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें जांच से संबंधित सामग्री मिलने का दावा किया गया है।
CBI ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपियों को लद्दाख की सक्षम अदालत में पेश किया गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि कथित गबन का दायरा कितना व्यापक था तथा इसमें अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं की कोई भूमिका रही या नहीं। एजेंसी विभिन्न वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रियाओं, श्रमिकों के दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
CBI के अनुसार, रक्षा मंत्रालय से प्राप्त शिकायत के बाद इस मामले की जांच को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ाया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि एकत्र किए जा रहे दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आगे और प्राथमिकी दर्ज करने अथवा अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए सभी आरोप प्रारंभिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित हैं। आरोपियों के विरुद्ध आरोपों की सत्यता और उनकी आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायालय में सुनवाई तथा प्रस्तुत साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
