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‘निगरानी में चूक, खजाने में लूट’: कई जिलों तक फैला वेतन घोटाले का जाल

Team The420
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बोकारो: पुलिस विभाग के वेतन मद से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के खुलासे ने प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। यह घोटाला केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई जिलों तक फैलता हुआ एक संगठित नेटवर्क का संकेत दे रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के नाम पर फर्जी तरीके से खाते सक्रिय कर वर्षों तक वेतन निकाला जाता रहा।

जांच के दौरान सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि वर्ष 2018 के बाद से बोकारो ट्रेजरी का जिला स्तर पर नियमित निरीक्षण ही नहीं किया गया। इस चूक को स्वीकार करते हुए उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा है कि अब से साल में दो बार ट्रेजरी की अनिवार्य जांच की जाएगी। इसके साथ ही वेतन भुगतान से पहले सभी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की कड़ाई से समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला इस ओर इशारा करता है कि सरकारी खजाने की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर अपनी भूमिका नहीं निभाई। इसका फायदा उठाकर आरोपियों ने सिस्टम में सेंधमारी की और अवैध निकासी का सिलसिला शुरू कर दिया। जांच में सामने आया है कि नवंबर 2023 से एकाउंटेंट ने कई रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के नाम को पोर्टल में फिर से सक्रिय किया, उनकी जन्मतिथि और पदनाम में बदलाव किया और तय वेतनमान से कहीं अधिक राशि निकाल ली।

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हैरानी की बात यह है कि ट्रेजरी स्तर पर भी इन लेनदेन पर कोई संदेह नहीं जताया गया। यदि समय-समय पर निरीक्षण किया गया होता, तो यह घोटाला पहले ही सामने आ सकता था। अब तक बोकारो में करीब ₹6 करोड़ की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है, जबकि हजारीबाग में यह आंकड़ा ₹30 करोड़ तक पहुंच चुका है। इसके बाद पूरे राज्य के कोषागार और पुलिस वेतन खातों की जांच शुरू कर दी गई है।

मामले के उजागर होने के बाद छह अप्रैल की रात एकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद सात अप्रैल को मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि, कार्रवाई के दौरान एक बड़ी चूक भी सामने आई, जब आरोपी की पत्नी अनु पांडे फरार हो गई। जांच में यह सामने आया है कि अवैध निकासी की राशि उसी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती थी।

पुलिस जब अनु पांडे को गिरफ्तार करने पहुंची, तब तक वह फरार हो चुकी थी। अब उसकी तलाश तेज कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

इस पूरे मामले में ‘कुबेर पोर्टल’ की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि पोर्टल में तकनीकी छेड़छाड़ की गई हो सकती है। बिना अधिकृत पहुंच के इस तरह की गतिविधि संभव नहीं मानी जाती, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी संगठित सिंडिकेट ने सिस्टम में सेंध लगाई। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस तकनीकी खामी का फायदा कैसे उठाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के घोटालों में आंतरिक मिलीभगत और तकनीकी कमजोरियों का संयुक्त उपयोग किया जाता है। वेतन भुगतान जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी होती है, लेकिन यदि हर स्तर पर सतर्कता में कमी हो, तो इस तरह के अपराध लंबे समय तक पकड़े बिना चलते रहते हैं।

फिलहाल, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है और फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। राज्य स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच शुरू की गई है। आने वाले दिनों में इस घोटाले का दायरा और बढ़ने की संभावना है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं

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