पटना: बिहार की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट (CCSU) ने फर्जी ‘बिहार टूरिज्म हेलीकॉप्टर बुकिंग’ वेबसाइट के जरिए लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच के दौरान गिरोह के दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कार्रवाई के दौरान फर्जी वेबसाइट को भी निष्क्रिय करा दिया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सरकारी पर्यटन पोर्टल जैसा दिखने वाला वेबसाइट तैयार कर लोगों को भ्रमित किया और हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर ऑनलाइन भुगतान करवाकर ठगी को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में 6 जुलाई 2026 को पटना साइबर थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66सी और 66डी के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने bihartourest.com नाम से एक पेशेवर ढंग से तैयार वेबसाइट बनाई थी, जिसे बिहार पर्यटन विभाग के आधिकारिक हेलीकॉप्टर बुकिंग पोर्टल के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
जांच में सामने आया कि वेबसाइट पर पटना, राजगीर, नालंदा और बोधगया जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध होने का दावा किया गया था। वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग, भुगतान की सुविधा, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और सोशल मीडिया लिंक भी दिए गए थे, जिससे लोगों को यह पूरी तरह वास्तविक और सरकारी वेबसाइट प्रतीत होती थी। इसी झांसे में आकर कई लोगों ने ऑनलाइन भुगतान किया और ठगी का शिकार हो गए।
तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह के दो कथित मास्टरमाइंड मुन्ना पासवान और मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से दो स्मार्टफोन, दो कीपैड मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक डायरी बरामद की गई, जिसमें साइबर ठगी से जुड़े रिकॉर्ड होने की आशंका जताई गई है। जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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प्रारंभिक पूछताछ और तकनीकी जांच में संकेत मिले हैं कि दोनों आरोपी फर्जी वेबसाइट तैयार करने और उसके संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। पुलिस अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों से प्राप्त डाटा का विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की कुल राशि कितनी है।
जांच के दौरान साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत डोमेन रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया। इसके बाद फर्जी वेबसाइट को निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे आगे किसी अन्य व्यक्ति के साथ इसी माध्यम से ठगी की संभावना समाप्त हो गई। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते वेबसाइट बंद कराए जाने से संभावित पीड़ितों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने से बचाया जा सका।
पुलिस ने जांच में गिरोह से जुड़े कई मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, बैंक खाते और अन्य डिजिटल पहचान भी चिन्हित किए हैं। इन सूचनाओं के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न राज्यों में कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां बैंकिंग लेनदेन, आईपी लॉग और डिजिटल ट्रेल का भी विश्लेषण कर रही हैं।
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वेबसाइट पर ऑनलाइन भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता अवश्य जांच लें। विशेष रूप से सरकारी सेवाओं, पर्यटन बुकिंग या टिकट आरक्षण से जुड़े पोर्टलों का आधिकारिक डोमेन, सुरक्षा प्रमाणपत्र (HTTPS) और संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से मिलान करना आवश्यक है। यदि किसी फर्जी वेबसाइट या ऑनलाइन ठगी की आशंका हो तो तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सतर्कता और समय पर शिकायत ही इस प्रकार की साइबर धोखाधड़ी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
