बरेली पुलिस ने निवेश ठगी के आरोपी कन्हैया गुलाटी की गिरफ्तारी पर ₹25 हजार का इनाम घोषित किया है, जिसके खिलाफ 64 मामले दर्ज हैं।

20 साल से निवेशकों को चूना लगाने का आरोप: 64 मुकदमों के बावजूद गिरफ्तारी से दूर कन्हैया गुलाटी, बरेली पुलिस ने घोषित किया ₹25 हजार का इनाम

Team The420
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उत्तर प्रदेश के बरेली में कथित निवेश घोटाले के आरोपी कन्हैया गुलाटी पर पुलिस ने शिकंजा और कसते हुए उसकी गिरफ्तारी पर ₹25 हजार का इनाम घोषित किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले लगभग दो दशकों से लोगों को धन दोगुना करने और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर कथित रूप से करोड़ों रुपये की ठगी करता रहा है। कई मामलों में मुकदमे दर्ज होने के बावजूद वह अब तक गिरफ्तारी से बचा हुआ है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कन्हैया गुलाटी के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में अब तक 64 धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध से जुड़े मामले दर्ज किए जा चुके हैं। कई मामलों में अदालतों ने उसके खिलाफ वारंट भी जारी किए हैं। गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कराया है ताकि देश के भीतर या बाहर उसकी संभावित आवाजाही पर नजर रखी जा सके।

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जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी लोगों को कम समय में निवेश की रकम दोगुनी होने और असाधारण रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाता था। इसी लालच में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी उसके पास निवेश की। आरोप है कि करोड़ों रुपये एकत्र करने के बाद वह निवेशकों को भुगतान किए बिना फरार हो गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुल कितने लोगों को कथित रूप से ठगी का शिकार बनाया गया और वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ।

गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने एसपी ट्रैफिक के नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया है, जो आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। जांच टीम उसके संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और सहयोगियों की भी पड़ताल कर रही है ताकि उसके नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके।

पुलिस का कहना है कि कार्रवाई केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। ठगी के शिकार लोगों की रकम वापस दिलाने के उद्देश्य से उसकी चल और अचल संपत्तियों का विवरण जुटाया जा रहा है। जांचकर्ता बैंक खातों, संपत्ति निवेश, व्यावसायिक हितों और रिश्तेदारों अथवा करीबी सहयोगियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रहे हैं। यदि अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों के साक्ष्य मिलते हैं तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

अधिकारियों ने संभावित पीड़ितों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। पुलिस का मानना है कि कई ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिन्होंने सामाजिक कारणों या कानूनी प्रक्रिया के डर से अब तक शिकायत दर्ज नहीं कराई हो। जांच में सामने आने वाली नई शिकायतें मामले के दायरे को और स्पष्ट कर सकती हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि निवेश पर असामान्य और गारंटीड रिटर्न का दावा अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी की पहली चेतावनी होता है। उनके अनुसार ठग आमतौर पर भरोसा जीतने, शुरुआती भुगतान दिखाने और सामाजिक नेटवर्क का उपयोग कर अधिक लोगों को जोड़ने की रणनीति अपनाते हैं। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी योजना में धन लगाने से पहले उसकी वैधता, नियामकीय स्वीकृति और वित्तीय पृष्ठभूमि की स्वतंत्र जांच अवश्य करें।

पुलिस ने संकेत दिया है कि यदि आरोपी की जल्द गिरफ्तारी नहीं होती है तो उस पर घोषित इनाम राशि बढ़ाने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा सकता है। 64 मुकदमों और करोड़ों रुपये की कथित ठगी के आरोपों के बावजूद आरोपी का लंबे समय तक गिरफ्तारी से बाहर रहना जांच एजेंसियों के लिए भी चुनौती बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विशेष जांच दल उसे कब तक गिरफ्तार कर पाता है और पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया कितनी सफल होती है।

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