आजमगढ़: विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर युवाओं को फंसाकर नशीले पदार्थों की तस्करी कराने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। इस गिरोह के झांसे में आए एक युवक को विदेश में आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ।
बिलरियागंज क्षेत्र के श्रीनगर सियरहा गांव निवासी सुनील यादव ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि असनी गांव के निवासी विनोद यादव उर्फ गुड्डू, श्याम यादव और लालजीत यादव मिलकर एक संगठित नेटवर्क चला रहे थे। ये लोग रानी की सराय क्षेत्र में कार्यालय खोलकर बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी का सपना दिखाते और इसके बदले मोटी रकम वसूलते थे। वीजा और टिकट की व्यवस्था के नाम पर भरोसा जीतने के बाद युवाओं को अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी में फंसाया जाता था।
पीड़ित के अनुसार, उसके भाई अजय यादव को भी इसी गिरोह ने दुबई भेजने के नाम पर 65 हजार रुपये लिए और फर्जी वीजा उपलब्ध कराया। विदेश रवाना करते समय आरोपियों ने उसे एक पैकेट दिया और कहा कि यह “दवा” है, जिसे दुबई एयरपोर्ट पर मिलने वाले व्यक्ति को सौंप देना है। अजय को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह पैकेट नशीले पदार्थ मार्फिन से भरा हुआ था।
दुबई के फुजैरा एयरपोर्ट पर जांच के दौरान अजय यादव के बैग से मार्फिन बरामद हुई। इस मामले में 23 दिसंबर 2025 को दुबई की अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिससे परिवार सदमे में आ गया। परिजनों का आरोप है कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया और वह पूरी तरह अनजान था।
भारत में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विनोद यादव उर्फ गुड्डू, श्याम यादव और लालजीत यादव को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और बेरोजगार युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जोड़ रहा था।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
इस बीच, मामले पर साइबर और डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क की भूमिका को लेकर भी विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। इस तरह के संगठित रैकेट्स पर टिप्पणी करते हुए प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे गिरोह “सोशल इंजीनियरिंग और झूठे वादों के जरिए युवाओं को फंसाते हैं और उन्हें बिना जानकारी के अंतरराष्ट्रीय अपराध में धकेल देते हैं। विदेश नौकरी के नाम पर मिलने वाले हर ऑफर की पूरी सत्यता जांचना बेहद जरूरी है।”
पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है और उनके ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। इस खुलासे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है और कई परिवार सामने आकर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह गिरोह सोशल मीडिया और स्थानीय नेटवर्क के जरिए बेरोजगार युवाओं से संपर्क करता था। नौकरी का भरोसा दिलाकर पासपोर्ट, वीजा और यात्रा की व्यवस्था दिखाई जाती थी। बाद में मामूली रकम के बदले “कोरियर डिलीवरी” या “दवा पैकेट” पहुंचाने का झांसा देकर उन्हें ड्रग तस्करी में फंसा दिया जाता था।
रानी की सराय में संचालित कथित कार्यालय इस पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र बताया जा रहा है, जहां से फर्जी दस्तावेज तैयार करने और पैसे वसूलने का काम किया जाता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने कितने राज्यों में इसी तरह के मामलों को अंजाम दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक स्थानीय ठगी नहीं, बल्कि मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़ा गंभीर अपराध है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान और गिरफ्तारियां संभव हैं और पूरे नेटवर्क का जल्द खुलासा किया जाएगा।
