ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश): अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने दस्तावेज़ी धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में असम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने फर्जी आश्वासनों और कागजी जालसाजी के जरिए कई लोगों से पैसे वसूले और उन्हें फार्मेसी व अन्य व्यवसायिक लाइसेंस दिलाने का झांसा दिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान असम के नॉर्थ लखीमपुर जिले के बिहपुरिया निवासी 33 वर्षीय देबोजीत शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे लगभग एक साल तक चली निगरानी के बाद 10 अप्रैल को मजगांव के पिथागुड़ी इलाके से गिरफ्तार किया।
अधिकारियों के अनुसार, शर्मा वर्ष 2023 से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ दोइमुख और नाहरलागुन क्षेत्रों में कई धोखाधड़ी के मामले दर्ज थे। उस पर आरोप है कि उसने कई लोगों से संपर्क कर यह दावा किया कि वह उन्हें सरकारी फार्मेसी पंजीकरण और अन्य व्यवसायिक मंजूरियां दिला सकता है, जिसके बदले उसने मोटी रकम वसूली।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नाहरलागुन की स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गंभीर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है और आगे की जांच जारी है।
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जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बनाया जो फार्मेसी क्षेत्र या छोटे व्यवसायों में जल्दी प्रवेश करना चाहते थे। पीड़ितों को सरकारी लाइसेंस दिलाने का झांसा देकर उनसे बड़ी रकम ली गई, लेकिन कोई भी वैध दस्तावेज जारी नहीं किया गया।
पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे फर्जी लाइसेंस रैकेट अक्सर बिचौलियों और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए काम करते हैं, जिससे इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ये गिरोह बेरोजगार युवाओं और छोटे व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों को आसान मंजूरी का लालच देकर ठगी करते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह की धोखाधड़ी की शिकायतें अलग-अलग क्षेत्रों से मिल रही हैं, जिससे आशंका है कि पीड़ितों की संख्या अधिक हो सकती है। पुलिस अब पूरे आर्थिक नुकसान और संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है।
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बढ़ती चिंता का विषय हैं, जहां फर्जी एजेंट और दलाल सरकारी प्रक्रियाओं का गलत फायदा उठाकर लोगों से पैसे ऐंठते हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार के लाइसेंस या सरकारी दस्तावेज के लिए भुगतान करने से पहले पूरी तरह सत्यापन करें।
पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी के अन्य लोगों से संबंधों की भी जांच की जा रही है और पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे होने की संभावना है। डिजिटल और ऑफलाइन नेटवर्क दोनों की गहन जांच जारी है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध ऑफर की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि सरकारी मंजूरी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं, जिनसे बचने के लिए लोगों को अधिक सतर्क रहने और हर जानकारी का सत्यापन करने की आवश्यकता है।
