आंध्र प्रदेश में ₹400 करोड़ के शराब परिवहन घोटाले में SIT की गहन पूछताछ, शेल कंपनियों और वित्तीय हेराफेरी के नेटवर्क पर केंद्रित जांच तेज

“परिवहन सिस्टम से लेकर फंड ट्रेल तक जांच: शराब घोटाले में बड़े गठजोड़ का शक”

Roopa
By Roopa
4 Min Read

आंध्र प्रदेश में सामने आए बहुचर्चित ₹400 करोड़ के शराब परिवहन घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे सिस्टम में फैले कथित वित्तीय और प्रशासनिक नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी उर्फ राज केसिरेड्डी से विजयवाड़ा में लंबी पूछताछ की है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले को केवल एक आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि संभावित रूप से एक संगठित ढांचे के रूप में देख रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि शराब परिवहन, वितरण और अनुबंध प्रणाली में किस स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई और किन प्रक्रियाओं के जरिए कथित तौर पर वित्तीय हेराफेरी को अंजाम दिया गया। शुरुआती जांच में अनुमान लगाया गया है कि इन अनियमितताओं के कारण राज्य के खजाने को लगभग ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ।

राज केसिरेड्डी को इस पूरे मामले का केंद्रीय चेहरा माना जा रहा है। आरोप है कि उन्होंने परिवहन अनुबंधों और सप्लाई चेन में प्रभावशाली भूमिका निभाते हुए एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसमें चुनिंदा कंपनियों और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया। इसके बदले में कमीशन और वित्तीय लेन-देन के जरिए बड़े पैमाने पर धन के इधर-उधर होने की आशंका जताई जा रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित घोटाले में शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिए फंड के प्रवाह को जटिल और अस्पष्ट बनाया गया। इन कंपनियों को इस तरह संरचित किया गया कि वास्तविक लाभार्थियों तक धन की पहुंच को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए। इसी वजह से जांच एजेंसियां अब बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड और कंपनी संरचनाओं की गहन जांच कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी से परिवहन अनुबंध प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए। SIT यह समझने की कोशिश कर रही है कि किस स्तर पर निर्णयों में बदलाव किया गया और किसके निर्देश पर कथित हेराफेरी को अंजाम दिया गया।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

जांच एजेंसियों का यह भी मानना है कि शराब आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता की कमी का फायदा उठाकर एक समानांतर संचालन प्रणाली विकसित की गई थी, जिसके जरिए कथित रूप से निगरानी तंत्र को कमजोर किया गया। इसी सिस्टम के माध्यम से अवैध कमाई और धन के स्थानांतरण का एक संगठित नेटवर्क तैयार हुआ।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस पूरे प्रकरण में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू शामिल हैं। इसी दिशा में वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों और कंपनियों के लेन-देन की बारीकी से जांच की जा रही है।

इस घोटाले के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। वहीं, प्रशासनिक तंत्र के भीतर भी इस तरह के बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें संगठित आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।

फिलहाल SIT सभी पहलुओं को जोड़कर इस पूरे नेटवर्क की संरचना को समझने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजी जांच के आधार पर इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article