नई दिल्ली। अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) से जुड़े बैंक लोन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व वरिष्ठ कार्यकारी अमिताभ झुनझुनवाला को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस जांच का हिस्सा है, जिसमें समूह की कंपनियों के जरिए कथित रूप से बैंक ऋणों के दुरुपयोग और शेल कंपनियों के माध्यम से धन के हेरफेर के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, झुनझुनवाला को लंबी पूछताछ के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां जांच एजेंसी ने उनकी विस्तृत पूछताछ के लिए कस्टडी की मांग की है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब वित्तीय संस्थानों से लिए गए बड़े ऋणों के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच एजेंसियां लगातार सख्त रुख अपना रही हैं।
जांच का केंद्र रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े लेनदेन हैं। आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से कई शेल या डमी कंपनियों को लोन जारी किए गए और बाद में उन फंड्स को अलग-अलग चैनलों से घुमाकर कथित रूप से अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया गया। इसी फंड डायवर्जन पैटर्न को जांच एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग के रूप में देख रही है।
अमिताभ झुनझुनवाला 2003 से 2019 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक रहे हैं, जो RHFL और RCFL की होल्डिंग कंपनी थी। इस दौरान वे समूह के वित्तीय ढांचे और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल रहे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी अवधि में वित्तीय लेनदेन की संरचना तैयार की गई, जिसके जरिए कथित रूप से ऋण वितरण और उपयोग में अनियमितताएं हुईं।
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मामले में यह भी सामने आया है कि कई ऐसी कंपनियों को लोन दिया गया जिनकी वित्तीय स्थिति कमजोर थी या जिनकी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में यह संदेह भी जताया जा रहा है कि इन कंपनियों का उपयोग केवल फंड ट्रांसफर चैनल के रूप में किया गया।
ED की कार्रवाई से वित्तीय क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला बड़े कॉर्पोरेट लोन स्ट्रक्चर और बैंकिंग सिस्टम में जोखिम प्रबंधन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। एजेंसी अब उन सभी लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, जिनसे यह पता लगाया जा सके कि फंड आखिर किन खातों और किन संस्थाओं तक पहुंचा।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मामले में और भी पूछताछ और संभावित गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि लोन अप्रूवल प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर निर्णय लिए गए और किस तरह से फंड फ्लो को मंजूरी मिली।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति या कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे कॉर्पोरेट लेंडिंग सिस्टम की निगरानी और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है। बड़े ऋणों के वितरण और उनके उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत को यह केस फिर से उजागर कर रहा है।
फिलहाल, अमिताभ झुनझुनवाला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की पूछताछ का सामना करेंगे, जबकि जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।
