लंदन:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने जहां कई क्षेत्रों में काम को आसान बनाया है, वहीं अब यह तकनीक धोखाधड़ी का नया हथियार भी बनती जा रही है। बीमा क्षेत्र में AI के जरिए फर्जी दावे (Insurance Claims) तैयार करने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में ऐसे मामलों में 71% की वृद्धि सामने आई है, जिसमें AI तकनीक की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
बीमा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अब ग्राहक और संगठित गिरोह AI की मदद से ऐसे सबूत तैयार कर रहे हैं, जो पहली नजर में पूरी तरह असली लगते हैं। इनमें कार के नुकसान की फर्जी तस्वीरें, नकली नंबर प्लेट और यहां तक कि ऐसे महंगे सामानों की तस्वीरें भी शामिल हैं, जो असल में मौजूद ही नहीं होते।
इस बढ़ते खतरे को लेकर Insurance Fraud Bureau ने भी चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि बीमा उद्योग इस नए ट्रेंड को लेकर “गंभीर रूप से चिंतित” है और इससे निपटने के लिए उन्नत तकनीकों में लगातार निवेश किया जा रहा है।
जांच में सामने आए मामलों में एक उदाहरण ऐसा था, जिसमें एक कार की तस्वीर में AI की मदद से नंबर प्लेट बदल दी गई थी, ताकि एक ही नुकसान के आधार पर अलग-अलग दावे किए जा सकें। इसी तरह एक सोने और हीरे की घड़ी की तस्वीर भी पेश की गई, जो पूरी तरह AI से बनाई गई थी और असल में उसका कोई अस्तित्व नहीं था।
अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में लोग असली नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, कार के मामूली डैमेज को गंभीर दुर्घटना जैसा दिखाया जाता है, जिससे क्लेम की राशि बढ़ाई जा सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अब AI का इस्तेमाल केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि नकली दस्तावेज तैयार करने में भी किया जा रहा है। कई मामलों में ऐसे कागजात पेश किए गए, जो कभी अस्तित्व में थे ही नहीं, लेकिन तकनीक के जरिए उन्हें पूरी तरह वास्तविक जैसा बना दिया गया।
हालांकि, बीमा कंपनियां भी इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीकी स्तर पर अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। एंटी-फ्रॉड सॉफ्टवेयर और डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स की मदद से अब यह पता लगाया जा सकता है कि कोई तस्वीर या दस्तावेज AI से तैयार किया गया है या उसमें छेड़छाड़ की गई है।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की धोखाधड़ी केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध गिरोह भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये गिरोह बड़े पैमाने पर फर्जी क्लेम तैयार कर बीमा कंपनियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, जिससे पूरे सिस्टम पर दबाव बढ़ता है।
बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई ग्राहक मौके का फायदा उठाकर अपने असली क्लेम को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जबकि संगठित गिरोह पूरी तरह फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी को और प्रभावी बना रहे हैं।
इस बढ़ती धोखाधड़ी का असर आम ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। जब बीमा कंपनियों को नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई प्रीमियम बढ़ाकर की जाती है, जिससे सभी ग्राहकों पर आर्थिक बोझ पड़ता है।
बीमा कंपनियों ने यह भी चेतावनी दी है कि फर्जी क्लेम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में न केवल क्लेम खारिज किया जाता है, बल्कि पॉलिसी रद्द होने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और आपराधिक मुकदमे तक चल सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अक्सर यह समझ नहीं पाते कि इस तरह की धोखाधड़ी के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। एक बार पकड़े जाने पर इसका असर लंबे समय तक उनके जीवन पर पड़ सकता है।
AI के बढ़ते प्रभाव के बीच बीमा उद्योग अब दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है—एक तरफ नई तकनीक का फायदा उठाना और दूसरी तरफ उसी तकनीक के दुरुपयोग को रोकना।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में AI आधारित धोखाधड़ी और भी जटिल हो सकती है, लेकिन इसके साथ ही एंटी-फ्रॉड तकनीक भी उतनी ही तेजी से विकसित हो रही है। ऐसे में यह तकनीकी “बिल्ली और चूहे” का खेल आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है।
