₹3 लाख की कथित रिश्वत लेते CBI ट्रैप में गिरफ्तारी के बाद मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश शर्मा की सदस्यता समाप्त कर दी गई है।

₹3 लाख की रिश्वत ने छीनी कैंट बोर्ड सदस्य की कुर्सी, सतीश शर्मा की सदस्यता खत्म

Team The420
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मेरठ: तीन लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किए गए मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश चंद्र शर्मा की सदस्यता अब खत्म कर दी गई है। रक्षा मंत्रालय ने छावनी अधिनियम, 2006 की धारा 34 के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया है। शर्मा फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं। कैंट बोर्ड कर्मचारियों ने जेल पहुंचकर उन्हें मंत्रालय के आदेश की प्रति तामील कराई।

सतीश शर्मा की गिरफ्तारी 30 मई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की गाजियाबाद शाखा ने की थी। उन पर आरोप है कि गांधी बाग से जुड़े एक ठेके के मामले में उन्होंने ठेकेदार से तीन लाख रुपये की रिश्वत ली। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था, जहां से न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया गया। पांच अगस्त को CBI की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी।

ठेकेदार की शिकायत पर हुआ था CBI ट्रैप

मामला 30 मई को उस समय सामने आया, जब CBI की गाजियाबाद शाखा ने ठेकेदार विक्की कश्यप की शिकायत पर कार्रवाई की। शिकायत गांधी बाग से संबंधित ठेके में कथित रिश्वत मांगने को लेकर की गई थी। शिकायत की जांच के बाद CBI ने ट्रैप की कार्रवाई की।

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जांच एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अंसल टाउन स्थित आवास से कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश शर्मा को कथित तौर पर तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें CBI की विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और तब से वह डासना जेल में बंद हैं।

जमानत नहीं मिली, कैंट बोर्ड ने शुरू की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा। कैंट बोर्ड ने भी सतीश शर्मा की सदस्यता को लेकर कार्रवाई शुरू की। इसके लिए छावनी अधिनियम की धारा 34 के तहत प्रक्रिया अपनाई गई।

रक्षा मंत्रालय की ओर से शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। चूंकि वह जेल में बंद थे, इसलिए नोटिस की तामील डासना जेल में कराई गई। शर्मा ने जेल से ही नोटिस का लिखित जवाब दाखिल किया।

जवाब मिलने के बाद मंत्रालय ने मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार किया। इसके बाद उनकी सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। मंत्रालय के आदेश के बाद कैंट बोर्ड के कर्मचारियों ने जेल पहुंचकर आदेश की प्रति सतीश शर्मा को सौंप दी।

मेरठ कैंट बोर्ड में अब कोई मनोनीत सिविल सदस्य नहीं

कैंट बोर्ड के प्रवक्ता के अनुसार, रक्षा मंत्रालय के आदेश के बाद डॉ. सतीश चंद्र शर्मा की सदस्यता समाप्त हो गई है। इसके साथ ही मेरठ कैंट बोर्ड में फिलहाल कोई मनोनीत सिविल सदस्य नहीं रह गया है।

सदस्यता समाप्त होने के बाद शर्मा अब कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य के तौर पर किसी भी भूमिका में नहीं रहेंगे। यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब उनके खिलाफ रिश्वत से जुड़े मामले में न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

2022 में बने थे कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य

डॉ. सतीश चंद्र शर्मा फरवरी 2022 में मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य बनाए गए थे। इसके बाद उनका कार्यकाल समय-समय पर छह महीने या एक वर्ष के लिए बढ़ाया जाता रहा। वह लगातार कैंट बोर्ड की गतिविधियों का हिस्सा रहे।

अब करीब चार साल बाद रिश्वत के आरोप में हुई गिरफ्तारी के बाद उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई है। मेरठ कैंट बोर्ड के इतिहास में यह पहली बार बताया जा रहा है कि रिश्वतखोरी के आरोप में किसी मनोनीत सदस्य की सदस्यता खत्म की गई है।

आपराधिक मामला अभी अदालत में विचाराधीन

सतीश शर्मा के खिलाफ रिश्वत से जुड़ी CBI की कार्रवाई और सदस्यता समाप्त करने की प्रशासनिक प्रक्रिया अलग-अलग हैं। CBI की विशेष अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है और आपराधिक मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

सदस्यता समाप्ति के बाद अब इस मामले का प्रशासनिक पक्ष पूरा हो गया है, लेकिन रिश्वत लेने के आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। फिलहाल डासना जेल में बंद सतीश शर्मा के खिलाफ CBI जांच और अदालत की कार्यवाही जारी है।

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