SEBI के अध्ययन के अनुसार FY26 में छोटे निवेशकों को F&O कारोबार में भारी नुकसान हुआ और कुल घाटा ₹91,685 करोड़ तक पहुंच गया।

शेयर बाजार में ‘छप्परफाड़ मुनाफे’ का सपना पड़ा भारी, छोटे निवेशकों ने गंवाए ₹91,685 करोड़

Team The420
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नई दिल्ली: शेयर बाजार में कम समय में बड़ी कमाई का सपना देखने वाले छोटे निवेशकों के लिए वायदा और विकल्प यानी Futures & Options (F&O) कारोबार एक बार फिर भारी पड़ता दिख रहा है। बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) के अध्ययन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में छोटे निवेशकों का कुल नुकसान करीब ₹91,685 करोड़ रहा। अध्ययन में यह भी सामने आया कि इस दौरान एक ट्रेडर को औसतन करीब ₹1.17 लाख का नुकसान उठाना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे निवेशकों के कुल नुकसान में सबसे बड़ा हिस्सा F&O कारोबार का रहा। कुल नुकसान का करीब 92 प्रतिशत हिस्सा इसी से जुड़ा बताया गया है। आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब SEBI की ओर से F&O कारोबार में खुदरा निवेशकों के जोखिम को कम करने के लिए कई सख्त कदम उठाए जा चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में व्यक्तिगत ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ा।

88% छोटे F&O ट्रेडर्स को हुआ नुकसान

अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 88 प्रतिशत छोटे निवेशकों को F&O कारोबार में नुकसान हुआ। रिपोर्ट में बताया गया कि 35 प्रतिशत कारोबारियों के पास कोई इक्विटी शेयर नहीं था, जबकि करीब 78 प्रतिशत निवेशकों का पोर्टफोलियो ₹1 लाख से कम था।

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कम पूंजी वाले निवेशक ही कुल नुकसान के करीब 70 प्रतिशत हिस्से से जुड़े रहे। इसका अर्थ है कि सीमित पूंजी के साथ बाजार में उतरने वाले खुदरा निवेशक जोखिम के लिहाज से सबसे अधिक प्रभावित हुए।

F&O कारोबार में अपेक्षाकृत कम पूंजी से बड़ी पोजीशन लेने की सुविधा निवेशकों को आकर्षित करती है, लेकिन बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव भी नुकसान को तेजी से बढ़ा सकता है। यही वजह है कि लगातार ट्रेडिंग करने वाले छोटे निवेशकों के लिए जोखिम और लागत दोनों बड़ी चुनौती बन जाते हैं।

सक्रिय ट्रेडर्स की संख्या में भी गिरावट

SEBI के सख्त नियमों के बाद F&O बाजार में खुदरा भागीदारी में कुछ कमी आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सक्रिय व्यक्तिगत ट्रेडर्स की संख्या करीब 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या करीब 98.1 लाख थी।

नए ट्रेडर्स की संख्या में भी लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाजार में सक्रिय बचे हुए ट्रेडर्स के बीच नुकसान का अनुपात काफी ऊंचा रहा।

आंकड़े यह संकेत देते हैं कि केवल ट्रेडर्स की संख्या कम होने से खुदरा निवेशकों का जोखिम खत्म नहीं हुआ है। बाजार में बने रहने वाले निवेशकों के लिए सही जोखिम प्रबंधन और अनुशासित ट्रेडिंग अब भी महत्वपूर्ण चुनौती है।

बार-बार ट्रेडिंग से बढ़ता है नुकसान

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे निवेशकों के लिए F&O में केवल बाजार की दिशा का सही अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं है। ब्रोकरेज, टैक्स, एक्सचेंज शुल्क और अन्य लेनदेन लागत लगातार ट्रेडिंग के दौरान मुनाफे को कम कर सकती हैं।

इसके अलावा, नुकसान की भरपाई के लिए बार-बार ट्रेडिंग करना स्थिति को और खराब कर सकता है। सीमित पूंजी वाले निवेशकों के लिए लीवरेज के कारण नुकसान उनकी उपलब्ध पूंजी के मुकाबले काफी बड़ा हो सकता है।

साइबर अपराध विशेषज्ञ ने भी दी सावधानी की सलाह

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ निवेशकों को केवल बाजार जोखिम ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन ठगी के जोखिम को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अनधिकृत निवेश समूहों के जरिए तेज मुनाफे का लालच देकर लोगों को संदिग्ध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या फर्जी निवेश योजनाओं में फंसाया जा सकता है।

उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी व्यक्ति, सोशल मीडिया ग्रुप या अनधिकृत प्लेटफॉर्म के भरोसे निवेश या ट्रेडिंग का फैसला न लें और किसी भी निवेश प्रस्ताव की वैधता की स्वतंत्र रूप से जांच करें।

छोटे निवेशकों के लिए जोखिम समझना जरूरी

SEBI के आंकड़े यह सवाल भी उठाते हैं कि क्या छोटे निवेशक F&O कारोबार की जटिलता और जोखिम को पूरी तरह समझकर बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। कम पूंजी के साथ बड़ी कमाई की उम्मीद अक्सर निवेशकों को अधिक जोखिम लेने के लिए प्रेरित करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अपनी आय, पूंजी, जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के आधार पर रणनीति तय करनी चाहिए। केवल तेजी से पैसा बनाने की उम्मीद में ऑप्शन ट्रेडिंग या लगातार F&O कारोबार करना नुकसान का जोखिम बढ़ा सकता है।

शेयर बाजार में मुनाफे की कोई गारंटी नहीं होती। ऐसे में FY26 के ये आंकड़े छोटे निवेशकों के लिए स्पष्ट संकेत हैं कि तेज कमाई के आकर्षण से ज्यादा जरूरी पूंजी की सुरक्षा, जोखिम की समझ और अनुशासित निवेश रणनीति है।

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