अजमेर में Insurance Policy Renewal के नाम पर ₹6.50 लाख की कथित साइबर ठगी मामले में Cybercrime Police ने दिल्ली से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

बाइक लोन के नाम पर ₹22.88 लाख का फर्जीवाड़ा, ग्राहकों के दस्तावेज से खुलवाए फर्जी खाते

Team The420
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खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में बाइक लोन के नाम पर ग्राहकों के दस्तावेजों का कथित दुरुपयोग कर ₹22.88 लाख से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। हरसूद थाना पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जो मोटरसाइकिल खरीदने के लिए Finance कराने पहुंचे ग्राहकों से पहचान और अन्य जरूरी दस्तावेज हासिल करता था। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ग्राहकों के नाम से फर्जी Bank Accounts खुलवाए जाते और फिर उनके नाम पर Loan स्वीकृत कराकर रकम दूसरे खातों में पहुंचा दी जाती थी। पुलिस ने मामले में श्रीराम फाइनेंस के पूर्व Sales Executive समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

40 ग्राहकों के नाम पर ₹22.88 लाख का खेल

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित गिरोह ने करीब 40 ग्राहकों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए कुल ₹22,88,567 की रकम से जुड़ा फर्जीवाड़ा किया। जिन लोगों के दस्तावेजों का कथित तौर पर इस्तेमाल हुआ, उनमें से कई को लंबे समय तक इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर Loan और Bank Account से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं।

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मामले की जांच श्रीराम फाइनेंस के Legal Department के Area Head संजय तंवर की शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत मिलने पर पुलिस ने Loan Applications, ग्राहकों के दस्तावेज, Bank Accounts और रकम के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।

दस्तावेज लेते और खुलवा देते थे फर्जी खाते

पुलिस के मुताबिक, आरोपी बाइक खरीदने के लिए Finance कराने वाले ग्राहकों से उनके पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज लेते थे। आरोप है कि बाद में इन दस्तावेजों का इस्तेमाल ग्राहकों की जानकारी के बिना Bank Accounts खुलवाने में किया जाता था।

इसके बाद कथित तौर पर उन्हीं ग्राहकों के नाम पर बाइक Loan स्वीकृत कराया जाता। Loan की रकम वास्तविक ग्राहक तक पहुंचने के बजाय उन Bank Accounts में ट्रांसफर की जाती थी, जिनका नियंत्रण आरोपियों के पास बताया जा रहा है। रकम खाते में पहुंचने के बाद उसे निकाल लिया जाता या दूसरे माध्यमों से इस्तेमाल किया जाता था।

इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित ग्राहकों को न तो Loan की जानकारी होती थी और न ही उनके नाम पर हुए कथित Financial Transactions का पता चलता था।

पूर्व Sales Executive को बताया मुख्य आरोपी

पुलिस ने मामले में विपुल पिता पदमसिंह ठाकुर को मुख्य आरोपी बताया है। वह कथित तौर पर पहले श्रीराम फाइनेंस में Sales Executive के तौर पर काम कर चुका है। पुलिस के अनुसार, Finance प्रक्रिया और ग्राहकों से दस्तावेज लेने की जानकारी होने के कारण उसकी भूमिका जांच में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पुलिस ने विपुल के अलावा श्यामसिंह सांवनेर और शिवम महाजन को भी गिरफ्तार किया है। तीनों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित फर्जी Loan की प्रक्रिया किस तरह संचालित की जाती थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

तीन आरोपी अब भी फरार

मामले में देवीराज सिंह, विशाल कोचले और विजयराज सिंह ठाकुर की तलाश की जा रही है। पुलिस उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर फरार आरोपियों की भूमिका और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ग्राहकों के दस्तावेज कहां-कहां इस्तेमाल किए गए और कथित फर्जी खातों को संचालित करने में किन लोगों ने मदद की।

और कितने ग्राहक हुए शिकार, जांच जारी

पुलिस अब उन सभी ग्राहकों की जानकारी जुटा रही है, जिनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित तौर पर Loan और Bank Accounts खोलने के लिए किया गया। जांच में Loan Applications, KYC Documents, Account Details और Financial Transactions का मिलान किया जा रहा है।

पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर पीड़ित ग्राहकों की संख्या और कथित धोखाधड़ी की रकम बढ़ सकती है। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य Finance Companies या बैंकों में भी ग्राहकों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

Bank और Loan Records से खुलेगी पूरी कड़ी

जांच में Bank Statements, Loan Approval Records, KYC Documents और रकम के ट्रांसफर से जुड़े Digital Records महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ग्राहकों के नाम पर स्वीकृत रकम सबसे पहले किन खातों में पहुंची और वहां से आगे कहां भेजी गई।

पूरे Money Trail की जांच के जरिए पुलिस कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ग्राहकों के दस्तावेज आरोपियों तक कैसे पहुंचे और उनका इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था।

फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस गिरोह के कथित नेटवर्क और फर्जी Loan की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। फरार तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और दस्तावेजों के आधार पर सामने आने वाले अन्य मामलों के बाद इस फर्जीवाड़े की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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