मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को Axis Mutual Fund के पूर्व चीफ डीलर वीरेश गंगाराम जोशी के खिलाफ दर्ज पुलिस FIR को रद्द कर दिया। यह मामला कथित फ्रंट-रनिंग रैकेट से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जोशी और उनके सहयोगियों ने म्यूचुअल फंड की आगामी ट्रेडिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया और इससे करीब 6.6 करोड़ निवेशकों को ₹2.52 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। हालांकि अदालत ने यह नहीं कहा कि आरोप गलत हैं या जोशी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। FIR रद्द करने का आधार मुख्य रूप से Securities and Exchange Board of India Act, 1992 में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया रही।
न्यायमूर्ति रंजितसिंह राजा भोसले की एकल पीठ ने कहा कि FIR में लगाए गए आरोपों का मूल स्वर फ्रंट-रनिंग से जुड़ा है और यह SEBI Act के तहत आने वाला अपराध है। कानून की धारा 26 के अनुसार, इस अधिनियम के तहत अपराध का संज्ञान अदालत तभी ले सकती है जब शिकायत SEBI या उसके अधिकृत अधिकारी की ओर से की गई हो। ऐसे में पुलिस द्वारा दर्ज FIR के आधार पर सीधे SEBI Act के अपराध की कार्यवाही आगे बढ़ाना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था।
पुलिस FIR की जगह SEBI शिकायत जरूरी
जोशी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर FIR रद्द करने की मांग की थी। उनके वकील ने तर्क दिया कि SEBI Act एक विशेष कानून है, जो प्रतिभूति बाजार से जुड़े अपराधों के लिए अलग प्रक्रिया निर्धारित करता है। इसलिए शिकायतकर्ता को पहले SEBI के समक्ष जाना चाहिए था और पुलिस FIR के जरिए सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती।
FIR एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जोशी और उनके चार सहयोगियों ने तीन कंपनियां बनाकर म्यूचुअल फंड की गोपनीय और गैर-सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल किया। आरोप के मुताबिक, इस जानकारी के आधार पर म्यूचुअल फंड के बड़े ट्रेड से पहले संबंधित शेयरों में लेनदेन किया गया और संभावित मूल्य परिवर्तन से निजी लाभ कमाया गया।
राज्य सरकार और Enforcement Directorate ने FIR रद्द करने की मांग का विरोध किया। ED ने अदालत को बताया कि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की भी जांच चल रही है और पुलिस FIR के आधार पर भारतीय दंड संहिता के तहत अन्य अपराधों की पर्याप्त सामग्री मौजूद है। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने SEBI Act से संबंधित कानूनी बाधा को निर्णायक माना।
अदालत ने आरोपों की गंभीरता पर भी जताई चिंता
अदालत ने स्पष्ट किया कि FIR रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि जोशी के खिलाफ लगाए गए आरोप समाप्त हो गए हैं या उन्हें मामले में निर्दोष घोषित कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि SEBI आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकता है और यदि कानून के तहत अपराध बनता है तो उचित कार्रवाई कर सकता है।
अदालत ने Axis Mutual Fund को भी SEBI के पास उपयुक्त शिकायत दर्ज कराने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता और उनके संभावित वित्तीय प्रभाव को देखते हुए नियामक संस्था को निवेशकों के हितों और प्रतिभूति बाजार की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
SEBI पहले ही लगा चुका है 7 साल का प्रतिबंध
हाईकोर्ट का आदेश ऐसे समय आया है जब जोशी के खिलाफ नियामकीय और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी अलग-अलग कार्यवाहियां जारी हैं। SEBI की जांच में आरोप लगाया गया था कि जोशी ने Axis Mutual Fund के आगामी ट्रेड से संबंधित गोपनीय जानकारी अपने सहयोगियों तक पहुंचाई। इन सहयोगियों ने कथित तौर पर फंड के ऑर्डर बाजार में आने से पहले ट्रेड कर संभावित मूल्य बदलाव से लाभ कमाया।
जुलाई 2026 में SEBI ने अपने अंतिम आदेश में जोशी को सात साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया था। उन पर ₹3 करोड़ का जुर्माना लगाया गया और कथित अवैध लाभ की रकम वापस करने का आदेश भी दिया गया। मामले में अन्य संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
ED की जांच में म्यूल खातों और विदेशी कनेक्शन का आरोप
Enforcement Directorate ने 2 अगस्त 2025 को कई स्थानों पर तलाशी के बाद जोशी को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप था कि कथित फ्रंट-रनिंग नेटवर्क से बड़े पैमाने पर अवैध लाभ कमाया गया और रकम को म्यूल बैंक खातों तथा दुबई स्थित एक ट्रेडिंग टर्मिनल के जरिए संचालित किया गया।
Axis Mutual Fund ने पहले स्पष्ट किया था कि ED की जांच उसके एक पूर्व कर्मचारी के कथित कार्यों से संबंधित है और इसका फंड हाउस के मौजूदा संचालन से कोई संबंध नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल पुलिस FIR के आधार पर चल रही कार्यवाही पर रोक लगी है, लेकिन मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। SEBI के पास आरोपों की जांच और कानून के तहत आगे कार्रवाई का रास्ता खुला है। ऐसे में आने वाले समय में नियामक की कार्रवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि कथित फ्रंट-रनिंग में कौन-कौन लोग शामिल थे और निवेशकों को हुए नुकसान तथा अवैध लाभ के आरोपों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
