मुंबई: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभक्ति के गीत तलाशना जोगेश्वरी की 56 वर्षीय एक महिला को भारी पड़ गया। समारोह की तैयारी के लिए मोबाइल फोन पर राष्ट्रभक्ति के गाने खोजते समय महिला ने एक संदिग्ध लिंक खोल दिया। इसके कुछ ही मिनट बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और दोबारा चालू करने पर खाते से तीन अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹44,560 निकलने के संदेश मिले। ठगी का पता चलने के बाद महिला ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध लिंक के जरिए मोबाइल और बैंकिंग जानकारी तक किस तरह पहुंच बनाई गई।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता अपनी सोसाइटी में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों में जुटी थीं। कार्यक्रम के लिए उन्हें देशभक्ति के गीत डाउनलोड करने थे। इसके लिए उन्होंने समारोह से करीब दो दिन पहले गूगल पर अलग-अलग गाने तलाशे। इसी दौरान स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले उनके मोबाइल पर एक लिंक पहुंचा। लिंक में एक ही जगह कई देशभक्ति गीत उपलब्ध होने का दावा किया गया था।
लिंक खोलते ही बदला मोबाइल का व्यवहार
महिला ने गाने हासिल करने की उम्मीद में लिंक खोल दिया। इसके कुछ ही समय बाद उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। उन्होंने फोन दोबारा चालू किया तो बैंक खाते से पैसे कटने के संदेश मिले। जांच में सामने आया कि तीन अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल ₹44,560 की रकम खाते से निकल चुकी थी। महिला को तब समझ आया कि जिस लिंक को उन्होंने देशभक्ति गीत डाउनलोड करने के लिए खोला था, वही साइबर ठगी का माध्यम हो सकता है।
साइबर पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि लिंक पर क्लिक करने के बाद मोबाइल में कोई संदिग्ध एप्लिकेशन या फाइल इंस्टॉल हुई थी या नहीं और क्या उसके जरिए बैंकिंग संबंधी जानकारी तक पहुंच बनाई गई। पुलिस डिजिटल लेनदेन की जानकारी के आधार पर रकम के प्रवाह और संभावित लाभार्थी खातों की भी पड़ताल कर सकती है।
त्योहार और भावनाओं को बना रहे ठगी का हथियार
साइबर अपराधियों की रणनीति में त्योहारों, राष्ट्रीय अवसरों और लोगों की भावनाओं से जुड़े विषयों का इस्तेमाल नया नहीं है। स्वतंत्रता दिवस जैसे मौकों पर देशभक्ति गीत, शुभकामना संदेश, सरकारी योजनाओं, पुरस्कारों और सेना से जुड़े संदेशों के नाम पर संदिग्ध लिंक प्रसारित किए जाते हैं। ऐसे लिंक देखने में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन उन्हें खोलने के बाद उपयोगकर्ता को फर्जी वेबसाइट, डाउनलोड पेज या अन्य डिजिटल जाल में ले जाया जा सकता है।
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग लोगों की जिज्ञासा और भावनात्मक प्रतिक्रिया का फायदा उठाते हैं। राष्ट्रीय पर्व के दौरान देशभक्ति से जुड़ी सामग्री की मांग बढ़ने के कारण अपराधी इसी रुचि को ठगी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए किसी भी अनजान नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट या वेबसाइट से मिले लिंक को बिना सत्यापन के खोलना जोखिम भरा हो सकता है।
पहले भी देशप्रेम के नाम पर सामने आए मामले
देशभक्ति या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सोशल मीडिया पर सेना कल्याण के नाम पर पैसे जमा कराने से जुड़ा एक कथित संदेश वायरल हुआ था। इसमें अभिनेता अक्षय कुमार की कथित सलाह और सरकार के फैसले का हवाला दिया गया था। बाद में साइबर पुलिस ने ऐसे संदेश को फर्जी बताया था।
कोरोना महामारी के दौरान भी सरकारी सहायता और प्रभावित परिवारों की मदद के नाम पर फर्जी बैंक खातों और क्यूआर कोड के जरिए लोगों से पैसे लेने के मामले सामने आए थे। इससे स्पष्ट है कि साइबर अपराधी मौजूदा घटनाओं और लोगों की भावनाओं के अनुरूप अपने ठगी के तरीके बदलते रहते हैं।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, a Researcher at Algoritha Security ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अवसर के दौरान वायरल हो रहे लिंक को विश्वसनीय मान लेना जोखिमपूर्ण है। लिंक किसी परिचित विषय या आकर्षक ऑफर से जुड़ा होने के बावजूद उसके स्रोत की स्वतंत्र रूप से जांच जरूरी है। खासकर बैंकिंग गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाले फोन में अनजान फाइल या एप्लिकेशन डाउनलोड करने से बचना चाहिए।
पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अनजान लिंक पर क्लिक न करने, संदिग्ध एप्लिकेशन इंस्टॉल न करने और किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी गई है। यदि खाते से अनधिकृत रकम निकल जाए तो पीड़ित को बिना देरी किए बैंक को सूचना देने के साथ साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती समय में शिकायत मिलने से रकम को रोकने या उसके प्रवाह पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
