अहमदाबाद में निर्माण कंपनी के अकाउंटेंट पर साइन किए हुए ब्लैंक चेक का दुरुपयोग कर ₹1.23 करोड़ की कथित हेराफेरी का आरोप लगा है।

भरोसे का फायदा उठाकर निर्माण कंपनी से ₹1.23 करोड़ की कथित हेराफेरी, अकाउंटेंट पर केस

Team The420
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अहमदाबाद: अहमदाबाद के CTM इलाके में एक निर्माण कंपनी के अकाउंटेंट पर अपने नियोक्ता के साथ कथित तौर पर ₹1.23 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने कंपनी की ओर से भुगतान करने के लिए उसे सौंपे गए साइन किए हुए ब्लैंक चेक का कथित दुरुपयोग किया और उनमें रकम भरकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए। आरोप है कि इन लेनदेन को कंपनी के लेखा रिकॉर्ड में लेबर पेमेंट के रूप में दर्ज किया गया।

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मामला कंपनी के ऑडिट के दौरान सामने आया। ऑडिट के समय कई भुगतानों के समर्थन में जरूरी बिल और दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद लेनदेन की गहराई से जांच की गई तो कथित तौर पर पता चला कि कंपनी के पैसे ऐसे बैंक खातों में भेजे गए थे, जिनका लेबर पेमेंट से कोई स्पष्ट संबंध नहीं था। इसके बाद बिल्डर ने खोखरा पुलिस से शिकायत की।

अकाउंटेंट को सौंपे गए थे साइन किए हुए ब्लैंक चेक

शिकायतकर्ता बिल्डर शरद पटेल घोड़ासर के रहने वाले हैं और CTM स्थित अनमोल आंगन कॉम्प्लेक्स में Mahadev Construction Private Limited और Om Infrastructure चलाते हैं।

शिकायत के अनुसार, मणिनगर निवासी मर्मिक पंड्या करीब 10 वर्षों से कंपनी में अकाउंटेंट के तौर पर काम कर रहा था। लंबे समय से कंपनी से जुड़े होने और उस पर भरोसे के कारण उसे विभिन्न भुगतान करने के लिए साइन की हुई ब्लैंक चेकबुक तक पहुंच दी गई थी।

आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए पंड्या ने कंपनी के पहले से हस्ताक्षर किए हुए चेक का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। इन चेक के जरिए कंपनी के खातों से रकम निकाली या अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई।

16 महीने तक कथित तौर पर जारी रही हेराफेरी

पुलिस के मुताबिक, कथित अनियमितताएं अगस्त 2024 से नवंबर 2025 के बीच हुईं। इस अवधि में आरोपी ने कथित तौर पर चेक में अलग-अलग रकम भरी और उन्हें विभिन्न बैंक खातों में जमा कराया।

शिकायत में आरोप है कि इन भुगतानों को कंपनी के Tally रिकॉर्ड में लेबर चार्ज के तौर पर दर्ज किया गया। नियमित कारोबारी खर्च की तरह दिखाई देने के कारण कथित लेनदेन लंबे समय तक पकड़ में नहीं आए।

हाल में कंपनी का ऑडिट कराया गया। इस दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट ने लेबर पेमेंट से संबंधित बिल और अन्य दस्तावेज मांगे। कंपनी के रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेज नहीं मिलने के बाद इन भुगतानों पर संदेह हुआ और बैंक लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू की गई।

असंबंधित खातों में भेजी गई रकम

जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि लेबर पेमेंट के नाम पर दर्ज कई रकम ऐसे लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी, जिनका कंपनी के श्रमिक भुगतान से कोई संबंध नहीं था।

बिल्डर ने आरोप लगाया है कि पंड्या ने कंपनी की ओर से दिए गए अधिकार और भरोसे का दुरुपयोग करते हुए कुल ₹1.23 करोड़ अपने सहयोगियों या परिचित लोगों से जुड़े खातों में ट्रांसफर किए।

अब पुलिस बैंक स्टेटमेंट, चेक की जानकारी, Tally रिकॉर्ड और लाभार्थी खातों की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन खातों में रकम पहुंची, उनके धारकों का निर्माण कंपनियों के साथ कोई वास्तविक कारोबारी या वित्तीय संबंध था या नहीं।

खोखरा पुलिस ने दर्ज किया मामला

शिकायत के आधार पर खोखरा पुलिस ने पंड्या के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कितने चेक का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया और प्रत्येक चेक के जरिए कितनी रकम ट्रांसफर हुई।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित हेराफेरी में अकाउंटेंट अकेला शामिल था या किसी अन्य व्यक्ति ने भी उसकी मदद की। बैंक रिकॉर्ड और कंपनी के लेखा दस्तावेजों का मिलान कर कथित लेनदेन की पूरी कड़ी तैयार की जा रही है।

मामला यह भी दिखाता है कि कर्मचारियों को साइन किए हुए ब्लैंक चेक सौंपने में किस तरह वित्तीय जोखिम पैदा हो सकता है। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच जारी है। पुलिस वित्तीय रिकॉर्ड, चेक ट्रेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कथित ₹1.23 करोड़ की हेराफेरी और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगा रही है।

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