राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए; शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर दायरे में नशे की बिक्री पर रोक, हर दिन छात्रों को दिलाई जाएगी नशामुक्ति की शपथ

विश्वविद्यालयों में नशे पर सख्ती: गेट पर ही खुलेगा ऑनलाइन और कूरियर सामान, हॉस्टलों-कैंटीन पर भी निगरानी

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By Roopa
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने का फैसला किया है। अब विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र-छात्राओं द्वारा ऑनलाइन मंगाई जाने वाली सामग्री और कूरियर की गेट पर ही जांच की जाएगी। इसके साथ ही हॉस्टल और कैंटीन में समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाएगा। शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर भी पूरी तरह रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह फैसला राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों के दौरान हॉस्टलों में नशे की सामग्री पहुंचने और छात्रों के बीच इसके इस्तेमाल को लेकर जताई गई चिंता के बाद लिया गया है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को व्यवस्था में सुधार और छात्रों को नशे से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नशामुक्ति अभियान को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी शुरू की है।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने विधानसभा परिसर में राज्य विश्वविद्यालयों के अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में नशे की प्रवृत्ति वाले छात्रों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके अभिभावकों को भी बुलाकर संवाद किया जाएगा, ताकि छात्र को नशे से बाहर निकालने के लिए परिवार और संस्थान मिलकर काम कर सकें।

नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन शॉपिंग या अन्य माध्यमों से छात्रों के नाम आने वाले कूरियर और डिलीवरी पैकेज की मुख्य गेट पर जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं डिलीवरी के माध्यम से प्रतिबंधित या नशीली सामग्री परिसर के भीतर तो नहीं पहुंचाई जा रही। हॉस्टल और कैंटीन में भी नियमित अंतराल पर औचक जांच की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

नशामुक्ति अभियान की निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश को पांच जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर पर वरिष्ठ नोडल अधिकारी, महाविद्यालय स्तर पर प्राचार्य और प्रत्येक संकाय में अलग नोडल अधिकारी अभियान की नियमित निगरानी करेंगे। इससे गतिविधियों की रिपोर्टिंग और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था मजबूत होगी।

अभियान को केवल निगरानी और कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। सभी राजकीय और निजी विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में प्रत्येक कार्यदिवस की शुरुआत से पहले छात्रों को दो मिनट की नशामुक्ति शपथ दिलाई जाएगी। परिसर और सार्वजनिक स्थानों पर होर्डिंग, वॉल पेंटिंग तथा सोशल मीडिया के माध्यम से भी अभियान का प्रचार किया जाएगा।

छात्रों को नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए रन फॉर नशामुक्ति, मैराथन, पैदल मार्च, भाषण, निबंध, चित्रकला, नाटक और नुक्कड़ नाटक जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक शिक्षक सप्ताह में एक बार अपनी कक्षा के अंतिम दस मिनट नशामुक्ति विषय पर छात्रों से संवाद और चर्चा करेंगे। इसके जरिए छात्रों की समस्याओं और नशे की ओर बढ़ने के संभावित कारणों को समझने का प्रयास किया जाएगा।

छात्रों में सकारात्मक सोच और जीवन मूल्यों को मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्रेरणादायी स्थलों के शैक्षिक भ्रमण भी कराए जाएंगे। विभाग का मानना है कि जागरूकता, काउंसलिंग और नियमित निगरानी के संयुक्त प्रयास से छात्रों को नशे से दूर रखने में मदद मिलेगी।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाल में विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों की अध्यक्षता के दौरान हॉस्टलों की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने हॉस्टलों में भोजन की व्यवस्था, खाने की गुणवत्ता और बाहर से आने वाले कूरियर के माध्यम से नशीली सामग्री पहुंचने की शिकायतों को गंभीरता से लिया था। उनके निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने अब निगरानी, जांच, काउंसलिंग और जनजागरूकता को एक साथ जोड़कर नशामुक्ति अभियान को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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