नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) से करीब ₹3 करोड़ का प्रॉपर्टी लोन धोखाधड़ी से हासिल करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेज, जाली पहचान और कथित शेल कंपनियों के जरिए लोन राशि हासिल कर उसका दुरुपयोग करने की साजिश में शामिल होने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान लक्ष्मी नगर निवासी मनीष कुमार (59) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को 14 जुलाई को उसके कार्यालय से हिरासत में लिया गया। उसके खिलाफ नई दिल्ली स्थित EOW थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120-B के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले की शुरुआत NBFC Protium Finance Ltd के अधिकृत प्रतिनिधि की शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली के आनंद विहार स्थित डी-ब्लॉक में एक संपत्ति की खरीद के लिए करीब ₹3 करोड़ का हाउसिंग लोन फर्जी तरीके से हासिल किया गया।
जांच में सामने आया कि 9 नवंबर 2022 को तैयार की गई एक बिक्री डीड में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। आरोप है कि एक व्यक्ति ने संपत्ति के वास्तविक मालिक के रूप में खुद को पेश कर फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार किए और बिक्री प्रक्रिया पूरी की। जांच में यह भी पता चला कि इसी व्यक्ति ने करीब 25 दिनों के भीतर उसी संपत्ति के लिए दो अलग-अलग फर्जी बिक्री दस्तावेज तैयार किए थे, जिनके आधार पर वित्तीय संस्थानों से लोन हासिल किए गए।
पुलिस के अनुसार, मनीष कुमार खुद को संपत्ति का वास्तविक खरीदार बताता था, लेकिन जांच में उसकी भूमिका कथित साजिशकर्ता के रूप में सामने आई। आरोप है कि उसने जाली टाइटल दस्तावेजों और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोन स्वीकृत कराया। इसके अलावा लोन की राशि को अलग-अलग फर्मों और कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित करने के लिए कथित तौर पर शेल कंपनियां बनाई गईं।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी ने लोन दस्तावेजों में एक मृत महिला को अपनी पत्नी और सह-आवेदक के रूप में दर्शाया था, जबकि उसकी वास्तविक पत्नी अलग है। पुलिस का कहना है कि इस फर्जीवाड़े का उद्देश्य वित्तीय संस्थान को भ्रमित कर लोन प्रक्रिया पूरी कराना था।
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पुलिस जांच में सामने आया कि मनीष कुमार M/s Global Trading Company संचालित करता था। आरोप है कि उसने M/s Global Finance Ltd और M/s Bankey Bihari Enterprises जैसी कथित फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर लोन हासिल करने की योजना बनाई।
जांच एजेंसियों ने आरोपी के कब्जे से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट, विभिन्न बैंकों की चेकबुक, प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इन सामानों की जांच के जरिए पुलिस कथित वित्तीय लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी स्नातक है और पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में फाइनेंसर तथा लोन सुविधा उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के रूप में काम करता था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के आधार पर उसे लक्ष्मी नगर स्थित किराए के मकान से पकड़ा गया।
अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और इस धोखाधड़ी में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका तथा कथित तौर पर हड़पी गई रकम के इस्तेमाल की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि खाली पड़ी संपत्तियों की नियमित निगरानी करें और खरीद-बिक्री से पहले सभी दस्तावेजों की गहन जांच करें। वहीं वित्तीय संस्थानों को भी संपत्ति आधारित लोन जारी करने से पहले दस्तावेजों और आवेदकों की पहचान की विस्तृत पुष्टि करने की सलाह दी गई है।
