तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने सबरीमला मंदिर में घी की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच (सीबी) को सौंपने का फैसला किया है। स्वास्थ्य एवं देवस्वम मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्ष बेहद गंभीर और चौंकाने वाले हैं। इसके मद्देनजर गृह विभाग को क्राइम ब्रांच जांच कराने के लिए पत्र भेजा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की समयबद्ध जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
सरकार ने इससे पहले देवस्वम विभाग के सचिव एम. जी. राजामणिक्कम को घी आपूर्ति में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। मंत्री के अनुसार रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि सबरीमला में घी आपूर्ति की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई है, जिसे आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी निष्पक्षता तथा पारदर्शिता के साथ की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) ने वर्ष 2025-26 के लिए मिल्मा के साथ 1.65 लाख लीटर घी की आपूर्ति का अनुबंध किया था। इस अनुबंध के तहत 5,000 लीटर की 30 खेपों में कुल 1.50 लाख लीटर घी की आपूर्ति की गई, जबकि शेष मात्रा अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। अब तक प्राप्त खेपों में से केवल छह बैचों की गुणवत्ता जांच संभव हो सकी और परीक्षण किए गए सभी छह बैच निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन निष्कर्षों के बाद पूरे आपूर्ति तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकार का कहना है कि यह मामला केवल खाद्य मिलावट तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ धोखाधड़ी और धार्मिक भावनाओं के शोषण से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि कथित अनियमितता घी के उत्पादन स्थल पर हुई, परिवहन के दौरान हुई या फिर सबरीमला पहुंचने के बाद किसी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता किया गया। घी के निर्माण, भंडारण, परिवहन और वितरण की पूरी श्रृंखला की जांच की जाएगी।
क्राइम ब्रांच को यह भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि घी की प्रत्येक खेप निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी या नहीं तथा गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया में कहीं लापरवाही या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। जांच के दौरान अनुबंध से जुड़े दस्तावेज, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, परिवहन रिकॉर्ड, आपूर्ति से संबंधित अभिलेख और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मंत्री ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सरकार कई नए सुरक्षा उपाय लागू करेगी। अब सबरीमला में उपयोग किए जाने वाले घी की प्रत्येक खेप का अलग-अलग परीक्षण अनिवार्य होगा। यदि बाहरी एजेंसियों से घी की खरीद की जाती है, तो निर्माण इकाई से लेकर अंतिम डिलीवरी तक उसकी डिजिटल ट्रैकिंग की जाएगी। इसके लिए संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला में डिजिटल मूवमेंट रजिस्टर भी बनाए रखा जाएगा, जिससे प्रत्येक चरण की निगरानी संभव हो सके।
सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल दोषियों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में धार्मिक संस्थानों के लिए होने वाली खरीद और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाना भी है। अधिकारियों के अनुसार क्राइम ब्रांच को समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार कार्रवाई का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है।
