नई दिल्ली: NEET-UG 2026 मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत खामी की पहचान की है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने पाया कि एक ही विषय विशेषज्ञों के पैनल को प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में उसका अनुवाद करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। जांच एजेंसी का मानना है कि इस व्यवस्था के कारण परीक्षा सामग्री तक अनधिकृत पहुंच की संभावना उत्पन्न हुई। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने इस संबंध में एनटीए को अवगत करा दिया है और अपनी अंतिम सिफारिशों में इस प्रक्रिया में बदलाव का सुझाव भी शामिल कर सकती है।
जांच से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 की यह कथित गड़बड़ी वर्ष 2024 के चर्चित NEET-UG पेपर लीक मामले से पूरी तरह अलग है। वर्ष 2024 में जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि परीक्षा केंद्र स्तर पर मिलीभगत के कारण प्रश्नपत्र चोरी कर प्रसारित किया गया था। उस मामले की जांच के बाद सीबीआई ने प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सुझाव दिए थे। एनटीए ने इन सुरक्षा उपायों को वर्ष 2025 और 2026 की परीक्षाओं में लागू किया, जिसके कारण इस बार पारंपरिक अर्थों में प्रश्नपत्र लीक होने के प्रमाण जांच में सामने नहीं आए।
इसके बजाय मौजूदा जांच कथित रूप से प्रश्न बैंक के अनधिकृत प्रसार पर केंद्रित है। जांच एजेंसी के अनुसार, मनीषा वाघमारे नामक एक महिला, जो कुछ शिक्षकों के परिचितों में शामिल थी और ब्यूटीशियन के रूप में कार्य करती थी, ने ट्यूशन पढ़ने वाले कुछ छात्रों के माध्यम से कथित रूप से प्रश्न बैंक हासिल किया। आरोप है कि इसके बाद उस सामग्री को प्रश्नपत्र के प्रारूप में टाइप कराया गया और धनंजय निवृत्ति लोखंडे को बेच दिया गया। जांच के अनुसार, लोखंडे ने इसे विभिन्न राज्यों में बिचौलियों के माध्यम से लाखों रुपये लेकर आगे प्रसारित किया।
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जांच अधिकारियों का मानना है कि इस कथित नेटवर्क के विस्तार में मनीषा वाघमारे की भूमिका महत्वपूर्ण रही। सूत्रों के अनुसार, यदि वह इस नेटवर्क का हिस्सा नहीं होती, तो कथित प्रश्न बैंक का प्रसार इतने बड़े स्तर तक नहीं पहुंचता। अब तक एकत्र साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी आरोपितों के बीच वित्तीय लेनदेन, डिजिटल संचार और आपसी संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि पुणे के तीन विषय विशेषज्ञ एनटीए के उस पैनल का हिस्सा थे, जिन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ-साथ मराठी भाषा में उसका अनुवाद करने का कार्य भी सौंपा गया था। जांच के अनुसार, इनमें रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी, भौतिकी की विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मांधरे और जीवविज्ञान की विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। जांच एजेंसी यह पड़ताल कर रही है कि क्या एक ही विशेषज्ञों को दोनों जिम्मेदारियां सौंपना प्रक्रिया संबंधी जोखिम का कारण बना। हालांकि, अब तक जांच एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से इन विशेषज्ञों पर प्रश्न बैंक लीक करने का कोई आरोप नहीं लगाया है और इस पहलू की जांच जारी है।
इस बीच, NEET परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली चार छात्रों की याचिकाओं को बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए परिणाम रद्द करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति एन. बी. सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति ए. डी. शिंदे की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि याचिकाओं में लगाए गए आरोप पर्याप्त साक्ष्यों से समर्थित नहीं हैं। अदालत ने चारों याचिकाएं खारिज करते हुए प्रत्येक याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का जुर्माना भी लगाया।
फिलहाल सीबीआई की जांच जारी है। एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन, गवाहों के बयान और प्रश्नपत्र तैयार करने तथा अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद एनटीए को प्रक्रिया में सुधार संबंधी औपचारिक सिफारिशें भेजे जाने की संभावना है, जबकि गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।
