SIM फ्रॉड, स्पूफ्ड कॉल, फिशिंग लिंक और फर्जी मोबाइल कनेक्शनों पर रोक के लिए उच्चस्तरीय बैठक; दूरसंचार कंपनियों, I4C और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर

साइबर अपराध पर ओडिशा का बड़ा वार: मल्टी-लेयर फ्रॉड नेटवर्क तोड़ने के लिए बनेगा स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर

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By Roopa
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भुवनेश्वर: साइबर अपराध के लगातार बढ़ते मामलों और अंतरराज्यीय ठगी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए ओडिशा सरकार ने स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (S4C) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस नए केंद्र का उद्देश्य साइबर अपराध की जांच को अधिक प्रभावी बनाना, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और कई स्तरों पर संचालित संगठित साइबर ठगी गिरोहों के सरगनाओं तक पहुंच बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को नई दिशा देगी।

राज्य में साइबर अपराध की जांच कर रही एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रही है कि वे अधिकांश मामलों में केवल शुरुआती स्तर के एजेंटों, बेनामी बैंक खाताधारकों या रकम निकालने वाले लोगों तक ही पहुंच पाती हैं, जबकि पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाले मास्टरमाइंड कानून की पकड़ से बाहर रह जाते हैं। इसके अलावा ठगी की गई रकम को विभिन्न बैंक खातों और मध्यस्थों के जरिए तेजी से स्थानांतरित किए जाने के कारण धन की रिकवरी भी बेहद कठिन हो जाती है।

अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न विभागों और राज्यों के बीच समन्वय की कमी भी जांच की रफ्तार को प्रभावित कर रही है। बेनामी बैंक खातों, शेल कंपनियों और साइबर अपराधियों से जुड़े रिकॉर्ड तक समय पर पहुंच न मिल पाने, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) से जानकारी प्राप्त करने में देरी तथा राज्यों के बीच सीमित सूचना साझा होने के कारण कई मामलों में जांच लंबी खिंच जाती है।

इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए प्रस्तावित S4C को राज्य की साइबर अपराध जांच का केंद्रीय नोडल केंद्र बनाया जाएगा। यह देशभर की साइबर पुलिस इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करेगा और तकनीकी विशेषज्ञों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, बैंकिंग संस्थानों, कानूनी एजेंसियों तथा कानून प्रवर्तन संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर जांच प्रक्रिया को तेज करेगा। सरकार का लक्ष्य साइबर मामलों में साक्ष्य जुटाने की क्षमता बढ़ाने, जांच में तेजी लाने और दोषसिद्धि दर में सुधार करना है।

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अधिकारियों के मुताबिक, यह केंद्र पुलिस महानिदेशक (DGP) के अधीन एक समर्पित इकाई के रूप में कार्य करेगा। इसका नेतृत्व पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) रैंक का अधिकारी करेगा, जो सीधे पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट करेगा। केंद्र के अंतर्गत साइबर जांच, साइबर ऑपरेशन और प्रवर्तन के लिए अलग-अलग प्रकोष्ठ बनाए जाएंगे। साथ ही राज्य के सभी साइबर पुलिस थानों और साइबर सेल के कामकाज में बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आज के साइबर अपराध पारंपरिक अपराधों से कहीं अधिक जटिल हो चुके हैं। अपराधी म्यूल बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टोकरेंसी और अंतरराज्यीय नेटवर्क का उपयोग कर अपनी पहचान छिपाते हैं। ऐसे में केवल स्थानीय स्तर की जांच पर्याप्त नहीं होती। उनके अनुसार, राज्य स्तर का समर्पित साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने, डिजिटल साक्ष्यों के त्वरित विश्लेषण, वित्तीय ट्रेल की निगरानी और पूरे साइबर इकोसिस्टम पर समन्वित कार्रवाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित देश के 10 राज्य पहले ही इसी तरह के साइबर अपराध समन्वय केंद्र स्थापित कर चुके हैं। इन राज्यों के अनुभवों का अध्ययन करने के बाद ओडिशा में भी इस मॉडल को लागू करने की प्रक्रिया तेज की गई है।

बताया गया है कि पिछले महीने गृह विभाग की संयुक्त सचिव मीनाक्षी बेहरा ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर राज्य में स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की सिफारिश की थी। इसके बाद प्रस्ताव पर तेजी से काम शुरू हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध अब राज्य या जिला स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, म्यूल बैंक खाते और शेल कंपनियों के जरिए संचालित साइबर ठगी नेटवर्क कई राज्यों और देशों तक फैले होते हैं। ऐसे में एक समर्पित समन्वय केंद्र न केवल जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करेगा, बल्कि साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और पीड़ितों को समय पर राहत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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