MGL KYC अपडेट के नाम पर फैलाए गए मालवेयर से देशभर में हजारों लोगों को बनाया निशाना; 967 फर्जी APK, 37,200 ग्राहकों का बैंकिंग डेटा और कई डिजिटल उपकरण बरामद

₹63.69 करोड़ के पैन-इंडिया साइबर फ्रॉड का खुलासा: फर्जी APK बेचने वाला शिक्षक गिरफ्तार, 2,993 लोगों से ठगी का आरोप

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By Roopa
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मुंबई: मुंबई पुलिस की डीबी मार्ग पुलिस ने देशभर में फैले ₹63.69 करोड़ के साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए झारखंड के 26 वर्षीय एक शिक्षक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर साइबर अपराधियों के लिए फर्जी एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज (APK) फाइलें तैयार करने और बेचने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि इन्हीं मालिशियस APK फाइलों का इस्तेमाल कर हजारों लोगों के मोबाइल फोन में सेंध लगाई गई और बैंक खातों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह नेटवर्क देशभर में ₹1,000 करोड़ से अधिक की संभावित साइबर ठगी को अंजाम दे सकता था।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान एस.के. मंडल के रूप में हुई है, जो झारखंड का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, वह गिरफ्तारी से बचने के लिए पश्चिम बंगाल में छिपा हुआ था, जहां से 24 जुलाई को उसे गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी कथित तौर पर साइबर अपराधियों को विशेष रूप से तैयार किए गए फर्जी APK उपलब्ध कराता था, जिनके जरिए लोगों के मोबाइल फोन और बैंकिंग विवरण तक अवैध पहुंच बनाई जाती थी।

मामले का खुलासा 3 जुलाई को मुंबई निवासी एक व्यक्ति की शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता को महानगर गैस लिमिटेड (MGL) के नाम से एक संदेश मिला, जिसमें KYC अपडेट करने के लिए APK फाइल डाउनलोड करने को कहा गया था। जैसे ही पीड़ित ने वह एप इंस्टॉल किया, उसके मोबाइल बैंकिंग क्रेडेंशियल्स कथित रूप से साइबर अपराधियों के हाथ लग गए और उसके खाते से ₹70,700 की अनधिकृत निकासी कर ली गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रैकिंग के दौरान पुलिस ने फर्जी APK फाइलों के स्रोत तक पहुंच बनाई। जांच में आरोप है कि आरोपी ने देशभर में सक्रिय साइबर अपराधियों को 91 मालिशियस APK फाइलें बेची थीं। इनका इस्तेमाल 2,993 लोगों को निशाना बनाने और 9,192 बैंकिंग लेनदेन के माध्यम से कुल ₹63,69,68,174 की साइबर ठगी करने में किया गया।

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गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, सात सिम कार्ड, चार डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड, 967 तैयार फर्जी APK फाइलें तथा करीब 37,200 ग्राहकों से जुड़ा गोपनीय बैंकिंग डेटा बरामद किया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह संवेदनशील डेटा कहां से प्राप्त किया गया और किन-किन साइबर गिरोहों तक इसकी आपूर्ति की गई।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद 967 APK फाइलें अभी तक बाजार में नहीं पहुंची थीं। यदि इन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचा दिया जाता तो देशभर में बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान हो सकता था। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई से एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क को समय रहते निष्क्रिय किया गया है और इसके अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच जारी है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि APK आधारित साइबर हमले आज वित्तीय धोखाधड़ी का सबसे खतरनाक माध्यम बन चुके हैं। उनके अनुसार, अपराधी बैंक, गैस कंपनी, बिजली विभाग, टेलीकॉम सेवा प्रदाता या KYC अपडेट के नाम पर फर्जी APK भेजकर लोगों को एप इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार एप इंस्टॉल होते ही मोबाइल का नियंत्रण, बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, OTP, संपर्क सूची और अन्य संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी संदेश में भेजी गई APK फाइल कभी डाउनलोड न करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन इंस्टॉल करें।

पुलिस अब आरोपी के वित्तीय लेनदेन, डिजिटल नेटवर्क, ग्राहक सूची और उससे जुड़े अन्य साइबर अपराधियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि देशभर में सक्रिय कितने साइबर गिरोह इस नेटवर्क से फर्जी APK फाइलें खरीदकर लोगों को निशाना बना रहे थे। अधिकारियों का मानना है कि इस जांच से देशव्यापी साइबर ठगी के एक बड़े संगठित नेटवर्क का और बड़ा खुलासा हो सकता है।

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