चेन्नई: तमिलनाडु क्राइम ब्रांच–क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CBCID) ने दिंडीगुल जिले के प्रसिद्ध पालनी मंदिर से जुड़े धंडापानी स्वामी मठ की लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अदालत के आदेशों और कानूनी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार कर मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति निजी व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित की गई। मामले में सरकारी अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वेल्लाथुरई, अनवरदीन, मुरुगादोस और सेतुपति के रूप में हुई है। CBCID के अनुसार, चारों पर कथित तौर पर जाली दस्तावेजों और फर्जी स्वामित्व अभिलेखों का इस्तेमाल कर मंदिर की जमीन का अवैध हस्तांतरण कराने में भूमिका निभाने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की गई है और मामले की आगे की जांच जारी है।
जांच के अनुसार, विवादित भूमि दिंडीगुल जिले में पालनी मंदिर की तलहटी स्थित पार्क रोड पर मौजूद धंडापानी स्वामी मठ की संपत्ति है। इस जमीन की अनुमानित बाजार कीमत करीब ₹100 करोड़ बताई गई है। आरोप है कि न्यायालय द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर इस संपत्ति को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया। शिकायत मिलने के बाद CBCID ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
जांच के दौरान एजेंसी ने कई व्यक्तियों और विभागों की भूमिका की पड़ताल की। इनमें तत्कालीन उप-पंजीयक जस्टिन मणिकंदन, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मुरुगादोस, तिरुप्पुर जिले के उदुमलपेट क्षेत्र के पप्पनकुलम निवासी वेल्लाथुरई, पालनी निवासी सेतुपति तथा मंदिर प्रशासन, राजस्व विभाग और पंजीकरण विभाग के अधिकारियों को जांच के दायरे में शामिल किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी सरकारी अधिकारी ने कथित अवैध हस्तांतरण में सहायता की या अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।
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CBCID के अनुसार, अब तक इस मामले में 82 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इनमें न्यायालयीन विवाद से जुड़े पक्षकार, दस्तावेज पंजीकरण अधिकारी, विक्रेता, भूमि हस्तांतरण से लाभान्वित व्यक्ति, गवाह, बिचौलिए, लिपिकीय कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने बड़ी मात्रा में दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य भी एकत्र किए हैं, जिनके आधार पर कथित साजिश और भूमि हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में पहले ही चार प्रमुख आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। विस्तृत जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद CBCID ने वेल्लाथुरई, अनवरदीन, मुरुगादोस और सेतुपति को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को संबंधित न्यायालय में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित भूमि घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे। विशेष रूप से यह जांच की जा रही है कि क्या सरकारी विभागों के किसी अधिकारी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति के हस्तांतरण को मंजूरी देने या प्रक्रिया को आसान बनाने में भूमिका निभाई। यदि जांच में नए साक्ष्य सामने आते हैं तो आगे और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
भूमि और संपत्ति संबंधी धोखाधड़ी के मामलों के जानकारों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों, ट्रस्टों और सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़ी जमीनों के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर अवैध हस्तांतरण कराने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में फर्जी दस्तावेज, जाली स्वामित्व रिकॉर्ड और पंजीकरण प्रक्रिया का दुरुपयोग कर संपत्तियों पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अभिलेखों का नियमित डिजिटलीकरण, दस्तावेजों का कड़ा सत्यापन और पंजीकरण प्रक्रिया में बहु-स्तरीय जांच ऐसी धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक है।
फिलहाल CBCID मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों की सत्यता, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और कथित साजिश के पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में इस बहुचर्चित मंदिर भूमि घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
