मुंबई के कल्याण में PPO नंबर सत्यापन के बहाने रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी से ₹7 लाख की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है।

तेलंगाना साइबर अपराध में देश में सबसे आगे, 2024 में दर्ज हुए 27,230 मामले

Roopa
By Roopa
5 Min Read

हैदराबाद: देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच तेलंगाना वर्ष 2024 में सबसे अधिक साइबर अपराध दर्ज करने वाला राज्य बनकर उभरा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में तेलंगाना में 27,230 साइबर अपराध दर्ज किए गए, जो देश में सबसे अधिक हैं। आंकड़े यह भी बताते हैं कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच राज्य में साइबर अपराध के मामलों में लगभग पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराधों के बढ़ते खतरे को दर्शाती है।

यह जानकारी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि एनसीआरबी हर वर्ष देशभर में दर्ज अपराधों का संकलन कर ‘क्राइम इन इंडिया’ रिपोर्ट प्रकाशित करता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2024 के आंकड़े तैयार किए गए हैं, जिनमें तेलंगाना शीर्ष पर है। मंत्री के अनुसार, कर्नाटक 21,993 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि अन्य राज्यों में भी साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया और मोबाइल इंटरनेट के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंच आसान हो गई है। फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी कस्टमर केयर, नौकरी का झांसा, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग और यूपीआई धोखाधड़ी जैसे अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। कई मामलों में संगठित साइबर गिरोह देश के विभिन्न राज्यों से संचालित होकर अंतरराज्यीय स्तर पर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।

केंद्र सरकार ने संसद में यह भी दोहराया कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न स्तरों पर कई पहल की गई हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के माध्यम से राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 के जरिए ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे कई मामलों में पीड़ितों की राशि समय रहते फ्रीज कराई जा सकी है।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

साइबर अपराध की जांच को मजबूत करने के लिए राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों को डिजिटल फोरेंसिक, वित्तीय ट्रैकिंग और तकनीकी विश्लेषण से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही बैंकों, वित्तीय संस्थानों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। उनके अनुसार अधिकांश मामलों में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग लिंक, फर्जी निवेश योजनाओं, स्क्रीन शेयरिंग ऐप और मैलवेयर के जरिए लोगों की व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी हासिल कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश पर भरोसा न करने और वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। आम नागरिकों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाना, मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय अपनाना और समय-समय पर सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। मजबूत पासवर्ड का उपयोग, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (2FA) सक्षम करना, केवल आधिकारिक स्रोतों से मोबाइल ऐप डाउनलोड करना और बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा न करना जैसी सावधानियां साइबर ठगी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि देश में साइबर अपराध लगातार नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक का उपयोग, तेज जांच और व्यापक जनजागरूकता अभियान ही इस बढ़ते खतरे पर प्रभावी नियंत्रण का आधार बन सकते हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article