विदेशों में बैठकर भारत के खिलाफ हत्या, जबरन वसूली, टेरर फंडिंग और संगठित अपराध का नेटवर्क संचालित करने वाले गैंगस्टरों और आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। इस अभियान को ‘ऑपरेशन ग्लोबल हंट’ नाम दिया गया है, जिसके तहत देश की प्रमुख जांच और सुरक्षा एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ फरार अपराधियों की गिरफ्तारी, प्रत्यर्पण और उनके आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने पर काम कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह अब तक के सबसे बड़े समन्वित अभियानों में से एक माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कई वांछित अपराधी कनाडा, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), मलेशिया और पाकिस्तान सहित विभिन्न देशों में शरण लेकर भारत में आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। इन पर हत्या, रंगदारी, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने जैसे गंभीर आरोप हैं।
इस अभियान में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इंटरपोल के सहयोग से संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए फरार आरोपियों की पहचान, लोकेशन, गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।
अभियान के तहत पिछले कुछ महीनों में लगभग 180 मोस्ट वांटेड गैंगस्टरों, आतंकवादियों और संगठित अपराध से जुड़े आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी कराए गए हैं। इसके अलावा करीब 110 अन्य संदिग्धों के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि उनकी पहचान, वर्तमान ठिकाने, गतिविधियों और यात्रा संबंधी दस्तावेजों की जानकारी जुटाई जा सके।
रेड कॉर्नर नोटिस इंटरपोल द्वारा जारी एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट होता है, जिसके माध्यम से सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से किसी वांछित आरोपी का पता लगाने और स्थानीय कानूनों के अनुसार उसे अस्थायी रूप से हिरासत में लेने का अनुरोध किया जाता है। इसका उद्देश्य संबंधित आरोपी के प्रत्यर्पण या कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होता है।
वहीं, ब्लू कॉर्नर नोटिस का उपयोग किसी संदिग्ध की लोकेशन, पहचान और गतिविधियों के संबंध में अतिरिक्त जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है। जांच एजेंसियां इन नोटिसों के माध्यम से फर्जी पासपोर्ट, जाली पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी जांच कर रही हैं।
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू अपराध और आतंकवाद के आर्थिक ढांचे को कमजोर करना भी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि इन नेटवर्कों के वित्तीय संसाधनों को समाप्त कर दिया जाए, तो उनके लिए संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों का संचालन करना कठिन हो जाएगा।
इसी रणनीति के तहत एजेंसियों ने 2,500 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया है, जिनका संबंध कथित तौर पर संगठित अपराध और टेरर फंडिंग नेटवर्क से बताया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में स्थित कई चल-अचल संपत्तियों को भी कुर्क या जब्त किया गया है।
कार्रवाई के दायरे में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े कौशल चौधरी, अमित डागर, इरफान उर्फ छेन्नू पहलवान और आसिफ खान की संपत्तियां भी शामिल हैं। इसके अलावा दाऊद इब्राहिम और इकबाल मिर्ची से जुड़ी बताई जाने वाली संपत्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई की गई है।
आतंकवाद से जुड़े मामलों में एजेंसियों ने गुरपतवंत सिंह पन्नू, अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला, लखबीर सिंह रोडे, अंकुश कपूर तथा हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े आरोपियों की पंजाब, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में स्थित संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन ग्लोबल हंट का उद्देश्य केवल फरार आरोपियों को भारत लाना नहीं, बल्कि उनके वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त करना है। एजेंसियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कानूनी प्रक्रिया और आर्थिक कार्रवाई के संयुक्त प्रयासों से सीमा पार संचालित संगठित अपराध और आतंकवादी नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
