मदुरै: तमिलनाडु के बहुचर्चित Neomax वित्तीय घोटाले में निवेशकों ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका आरोप है कि करीब ₹10,000 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है। निवेशकों का दावा है कि करीब 85 हजार लोग इस मामले से प्रभावित हैं और इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी रियल एस्टेट कंपनी और उसकी समूह कंपनियों में निवेश की थी। निवेशकों का कहना है कि कार्रवाई शुरू होने के बावजूद अधिकांश लोगों को अब तक उनकी मूल रकम और अपेक्षित रिटर्न वापस नहीं मिल पाया है।
मदुरै में गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान निवेशकों ने कहा कि मामले की जांच और संपत्तियों की पहचान में हो रही देरी से उनकी आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। कई निवेशकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक है और उनके लिए निवेश की रकम केवल अतिरिक्त आय का साधन नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन की आर्थिक सुरक्षा थी। रकम वापस नहीं मिलने से ऐसे परिवारों को रोजमर्रा के खर्च, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और अन्य जरूरी जिम्मेदारियों को पूरा करने में परेशानी हो रही है।
85 हजार निवेशकों के प्रभावित होने का दावा
निवेशकों के अनुसार, Neomax मामले में करीब 85 हजार लोग प्रभावित हुए हैं और कथित घोटाले का अनुमानित आकार लगभग ₹10,000 करोड़ है। यह आंकड़ा फिलहाल निवेशकों की ओर से किया गया दावा है। मामले की वास्तविक वित्तीय क्षति और प्रभावित लोगों की संख्या जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
निवेशकों का कहना है कि EOW के मौजूदा कर्मचारी इस मामले की जांच के साथ-साथ अपनी इकाई के दूसरे मामलों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उनका आरोप है कि सीमित मानव संसाधन के कारण Neomax मामले में संपत्तियों का पता लगाने, दस्तावेजों की जांच करने और संभावित संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
एक निवेशक ए शिवतार्शिनी ने कहा कि अधिकांश लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत कंपनी में लगाई थी और कई निवेशक 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। उन्होंने सरकार से मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष व्यवस्था करने की मांग की।
अलग SP और विशेष टीम की मांग
निवेशकों ने सुझाव दिया है कि मामले की जांच के लिए एक पुलिस अधीक्षक यानी SP को विशेष रूप से नियुक्त किया जाए। इसके अलावा पर्याप्त संख्या में जांच अधिकारियों और कर्मचारियों की अलग टीम बनाई जाए, ताकि मामले की जांच अन्य मामलों के कारण प्रभावित न हो।
निवेशकों का कहना है कि जांच के दौरान कंपनी और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों की पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, संपत्तियों का पता लगाकर उन्हें समय पर कुर्क किया गया तो भविष्य में निवेशकों की रकम की वसूली की संभावना मजबूत हो सकती है। देरी होने पर कथित तौर पर संबंधित संपत्तियों के हस्तांतरण या अन्य वित्तीय लेनदेन का जोखिम भी बढ़ सकता है।
निवेशकों की आर्थिक परेशानी बढ़ी
एक अन्य निवेशक और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी ए रोशन खान ने मामले की सुनवाई में तेजी लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई निवेशक अपनी रकम और अपेक्षित लाभ वापस नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य और पारिवारिक जरूरतों का खर्च उठाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
निवेशकों ने आरोपियों को जमानत दिए जाने का भी विरोध किया और अदालत से मामले की गंभीरता को ध्यान में रखने की मांग की। उनका कहना है कि निवेशकों के हितों और सुरक्षा को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया में तेजी जरूरी है। हालांकि, जमानत से संबंधित फैसला अदालत संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगी।
12 से 30 प्रतिशत तक रिटर्न का कथित वादा
Neomax Properties Private Ltd और उसकी समूह कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने रियल एस्टेट और प्लॉट विकास परियोजनाओं में निवेश के नाम पर कई लोगों से लाखों रुपये जमा कराए। निवेशकों का आरोप है कि उन्हें निवेश पर 12 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक रिटर्न देने का वादा किया गया था।
आकर्षक रिटर्न के भरोसे कई लोगों ने अपनी बचत कंपनी में लगा दी। निवेशकों का कहना है कि बाद में वादे के मुताबिक भुगतान नहीं किया गया और उनकी रकम फंस गई। अब उनका मुख्य उद्देश्य निवेश की मूल रकम की वापसी है।
जांच की गति बढ़ाने पर जोर
निवेशकों का कहना है कि मामले में कुछ कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन वह उनकी अपेक्षाओं के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। उनका जोर संपत्तियों की पहचान, उन्हें कुर्क करने, कथित वित्तीय लेनदेन की जांच और निवेशकों की रकम वापस कराने की प्रक्रिया को तेज करने पर है।
फिलहाल मामले की जांच EOW कर रही है। घोटाले की वास्तविक रकम, प्रभावित निवेशकों की अंतिम संख्या और संबंधित संपत्तियों की स्थिति जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट हो सकती है। निवेशकों की मांग के बीच राज्य सरकार और जांच एजेंसी पर इस मामले में विशेष टीम गठित कर कार्रवाई तेज करने का दबाव बढ़ गया है।
