मेरठ: सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाकर एक डेयरी संचालक से वसूली करने के मामले में मेरठ पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, जीवनपुरी निवासी शिवम उर्फ शिवा उर्फ कृष्णा को जांच में भूमिका सामने आने के बाद पकड़ा गया। आरोप है कि वारदात के दौरान शिवम ने खुद को पुलिसकर्मी के रूप में पेश किया था। उसकी गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब आरोपियों के बीच संपर्क, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और कथित वसूली के पूरे तरीके की जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर डेयरी संचालक से संपर्क किया और बाद में उसे कथित तौर पर एक महिला से बातचीत के मामले में फंसाकर दबाव में लेने की योजना बनाई। इसके बाद फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ित को डराया गया। आरोप है कि उसे पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर तक की धमकी दी गई, ताकि वह आरोपियों की मांग के मुताबिक रकम देने के लिए मजबूर हो जाए।
Instagram पर फर्जी पहचान से शुरू हुआ संपर्क
पुलिस पूछताछ में शिवम ने कथित तौर पर बताया कि राहुल पाल ने सोशल मीडिया पर ‘शशांक’ नाम से फर्जी अकाउंट बनाया था। इसी पहचान के जरिए डेयरी संचालक शशांक शर्मा से संपर्क किया गया। आरोप है कि राहुल इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर पीड़ित से बातचीत करता था और बाद में अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर उसे डराने की कोशिश की गई।
शिवम के अनुसार, राहुल कभी खुद को CO तो कभी थानेदार बताकर पीड़ित से बात करता था। इस दौरान उसे यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया गया कि उसके खिलाफ गंभीर शिकायत है और पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। पुलिस अब पूछताछ में सामने आए इन दावों की डिजिटल और अन्य साक्ष्यों के जरिए पुष्टि कर रही है।
शिवम ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि इस वारदात में कुल चार लोग शामिल थे। हालांकि, पुलिस इस बयान को अंतिम तथ्य नहीं मान रही है। जांचकर्ता सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, चैट और वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए आरोपियों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट करने में जुटे हैं।
मॉल के सामने से कार में बैठाकर बनाया बंधक
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने डेयरी संचालक को एक शॉपिंग मॉल के सामने सड़क पर मिलने के लिए बुलाया। वहां पहुंचने के बाद उसे कथित तौर पर कार में बैठा लिया गया और बंधक बनाकर एक कार्यालय ले जाया गया। आरोप है कि इस दौरान उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी, जिससे वह आसपास की जगह और आरोपियों की गतिविधियों को पहचान न सके।
कार्यालय पहुंचने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को पुलिस अधिकारी बताया और पीड़ित के साथ मारपीट की। उसे एनकाउंटर की धमकी देकर डराया गया। आरोपियों ने उस पर शोषण से जुड़ा आरोप लगाया और कहा कि उसके खिलाफ शिकायत की गई है। इसके बाद शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने के बदले रकम की मांग की गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित से ₹2 लाख की मांग की थी। दबाव के बीच ऑनलाइन ई-वॉलेट के माध्यम से ₹10 हजार की रकम वसूल भी की गई। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया और मामले की जानकारी दी।
पहले तीन आरोपी जेल भेजे जा चुके
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले तीथरा गांव निवासी विशाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 1 अगस्त को टीपीनगर क्षेत्र के मोहकमपुर स्थित एक कार्यालय पर छापेमारी की गई। कार्रवाई में रिठानी गांव निवासी राहुल पाल और पुठ्ठा गांव निवासी आकाश को गिरफ्तार किया गया। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
अब शिवम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों की भूमिकाओं को जोड़ने में जुटी है। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट किसने बनाए, पीड़ित की निजी जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची और कथित वसूली की रकम किसके पास गई।
दूसरे लोगों को भी निशाना बनाने की जांच
पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि क्या आरोपियों ने इसी तरीके से किसी अन्य व्यक्ति को भी निशाना बनाया था। जांच में सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करने, फर्जी पहचान बनाने और पुलिस अधिकारी बनकर धमकाने के आरोपों की अलग-अलग स्तर पर पड़ताल की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, कॉल डिटेल और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों की पुष्टि की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, जांच में शिवम का नाम सामने आने के बाद उसकी गिरफ्तारी की गई है। यदि आगे की जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस चारों आरोपियों की भूमिका और कथित हनी ट्रैप के जरिए वसूली के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
