मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन के लिए रियायती दर पर उपलब्ध कराए जाने वाले सरकारी चावल के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि एथेनॉल संयंत्रों के लिए भेजे गए सब्सिडी वाले चावल को बीच रास्ते निजी राइस मिलों में डायवर्ट कर दोबारा सरकारी खरीद और कस्टम मिलिंग चक्र में शामिल किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
जांच की शुरुआत भारतीय खाद्य निगम (FCI) की उस शिकायत से हुई, जिसमें बताया गया कि छिंदवाड़ा स्थित एक एथेनॉल संयंत्र के लिए भेजी गई चावल की खेप अपने निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंची। पुलिस जांच में यह खेप बालाघाट की एक राइस मिल में मिली, जिसके बाद ट्रांसपोर्टरों, राइस मिलों और एथेनॉल कंपनियों के बीच संभावित गठजोड़ की आशंका गहरा गई।
अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लागू सब्सिडी योजना के तहत आवंटित चावल के कथित डायवर्जन से जुड़ा है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) और कस्टम मिल्ड राइस (CMR) को सरकार रियायती दर पर अधिकृत एथेनॉल संयंत्रों को उपलब्ध कराती है। हालांकि जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसी चावल को निजी मिलों में भेजकर दोबारा सरकारी खरीद प्रणाली में शामिल किया जा रहा था।
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SIT की जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि एक बार डायवर्ट की गई चावल की खेप को कई बार पुनः उपयोग किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ है, तो सरकार अनजाने में उसी चावल की मात्रा के लिए मूल कीमत से चार से छह गुना अधिक भुगतान कर सकती है, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान होने की आशंका है।
बालाघाट में दर्ज एफआईआर में राहुल प्रताप, जो छिंदवाड़ा के बोरगांव स्थित AVJ Agrico Private Limited के एथेनॉल संयंत्र का अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया है, ट्रक चालक दुर्गेश शेंडे और राइस मिल संचालक सौरभ संचेटी को नामजद किया गया है।
पुलिस के अनुसार, मामला तब दर्ज किया गया जब 242 क्विंटल चावल से लदा एक ट्रक, जो नवेगांव स्थित FCI डिपो से छिंदवाड़ा के एथेनॉल संयंत्र के लिए रवाना हुआ था, वारासीवनी स्थित संचेटी राइस मिल के परिसर में खड़ा मिला। अधिकारियों ने बताया कि उसी दिन FCI डिपो से तीन ट्रक रवाना हुए थे, लेकिन केवल एक ट्रक को ही पकड़ा जा सका। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला बड़े रैकेट का केवल शुरुआती खुलासा हो सकता है और राज्य के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं।
फिलहाल SIT पूरे आपूर्ति नेटवर्क, परिवहन रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संबंधित कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और संभावित आर्थिक नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
