उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच इकाइयों ने सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार दिलाने के नाम पर चल रहे एक हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी गई औपचारिक शिकायत के आधार पर, हजरतगंज पुलिस थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। सरकारी दस्तावेजों की फॉरगरी का यह मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा विभागीय जांच से निकलकर सक्रिय आपराधिक धरपकड़ में बदल गया है, जिसका उद्देश्य युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगने वाले अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश करना है।
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जाली नियुक्ति प्रक्रिया का जाल और अभ्यर्थियों को फंसाने की रणनीति
इस पूरे आर्थिक और प्रशासनिक अपराध की रूपरेखा को अंजाम देने के लिए जालसाज नेटवर्क ने सरकारी नौकरियों की तलाश कर रहे शिक्षित और बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाया। गिरोह ने अभ्यर्थियों का भरोसा जीतने के लिए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) और पीडब्ल्यूडी विभाग के नाम का सहारा लेकर एक पूरी तरह से काल्पनिक भर्ती प्रक्रिया का निर्माण किया।
इस संगठित सिंडिकेट ने अपनी धोखाधड़ी की योजना को तीन लगातार परिचालन चरणों के माध्यम से संचालित किया। ऑपरेटरों ने सबसे पहले ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के तकनीकी व लिपिकीय योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों का डेटा विभिन्न अनधिकृत जॉब पोर्टल्स से एकत्र किया। इसके बाद दूसरे चरण में, इन अभ्यर्थियों के पते पर उच्च गुणवत्ता वाले जाली इंटरव्यू लेटर भेजे गए, जिसमें उन्हें 1 मई से 16 मई के बीच सेक्शन-1 में लिपिक (क्लर्क) पदों के साक्षात्कार के लिए लखनऊ पहुंचने का निर्देश दिया गया था। अंतिम चरण में, इन जाली पत्रों के माध्यम से जालसाज प्रबंधकों ने स्थायी सरकारी नियुक्ति पक्की करने और प्रशासनिक मंजूरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से भारी नकद प्रीमियम और अग्रिम सुरक्षा राशि की मांग की।
वीआईपी हस्ताक्षरों की नकल और मुख्यालय में रेड अलर्ट
इस सुनियोजित भर्ती घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब दर्जनों अभ्यर्थी अपने भौतिक इंटरव्यू पत्रों के साथ लखनऊ स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय पहुंचे और वहां तैनात अधिकारियों से अपने संबंधित साक्षात्कार कक्ष की जानकारी मांगने लगे। स्वागत पटल पर मौजूद सतर्क सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों को इन पत्रों के लेआउट डिजाइन, कागज की गुणवत्ता और उन पर दर्ज सीरियल नंबरों में गंभीर तकनीकी खामियां नजर आईं। इसके बाद जब वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने आंतरिक डेटाबेस से मिलान किया, तो पुष्टि हुई कि विभाग द्वारा ऐसी किसी भी क्लर्क भर्ती या साक्षात्कार का आयोजन नहीं किया जा रहा है।
विभागीय फॉरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि जालसाजों ने विभाग के विशेष सचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी के आधिकारिक हस्ताक्षरों, उनके पदनाम और शासकीय मुहरों की हूबहू नकल तैयार की थी। गिरोह ने अभ्यर्थियों को पूरी तरह भ्रमित करने के लिए राज्य के आधिकारिक प्रतीक चिन्ह वाले लुकअलाइक लेटरहेड्स का उपयोग किया था। विभाग की प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर समानांतर भर्ती तंत्र चलाने की इस गंभीर कोशिश को देखते हुए, विशेष सचिव ने तुरंत सभी जाली दस्तावेज पुलिस को सौंपकर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए।
धन उगाही का एंगल और डिजिटल फुटप्रिंट्स की ट्रैकिंग
हजरतगंज पुलिस और साइबर सेल की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह रैकेट केवल दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे लाखों रुपये की अवैध वसूली का एक बड़ा वित्तीय तंत्र काम कर रहा था। शुरुआती गवाहों और पीड़ितों से पूछताछ में संकेत मिले हैं कि जालसाज सिंडिकेट प्रति उम्मीदवार ₹5 लाख से ₹8 लाख तक के अवैध पैकेज की मांग कर रहा था। गिरोह ने बैंकिंग सुरक्षा प्रणालियों के ऑटोमैटिक फ्रॉड अलर्ट से बचने के लिए पीड़ितों को यह राशि केवल नकद में देने या अस्थायी मनी म्यूल खातों में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे।
स्थानीय पुलिस की तकनीकी टीमें अब उन मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप ग्रुपों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) की गहन जांच कर रही हैं जिनके जरिए आरोपियों ने अभ्यर्थियों से संपर्क साधा था। शुरुआती तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी आईडी पर लिए गए सिम कार्ड और वर्चुअल नंबरों का उपयोग किया था। पुलिस की विशेष टीमें लखनऊ और उसके आसपास के जिलों में संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि क्या विभाग के भीतर के किसी कर्मचारी ने अभ्यर्थियों का व्यक्तिगत डेटा लीक करने में इन बाहरी सलाहकारों की मदद की थी।
शून्य-विश्वास भर्ती प्रणाली और भविष्य के सुरक्षा सुधार
सरकारी विभाग के नाम पर हुए इस बड़े दस्तावेजी फर्जीवाड़े ने राज्य की प्रशासनिक भर्ती प्रक्रियाओं और सुरक्षा जांचों को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि केवल भौतिक पत्रों और हस्ताक्षरों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण संगठित अपराधी आसानी से सरकारी तंत्र का रूप धरकर आम जनता का शोषण कर लेते हैं।
भविष्य में ऐसी रोजगार संबंधी धोखाधड़ी को पूरी तरह रोकने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक सुरक्षा बोर्ड अब शून्य-विश्वास (ज़ीरो-ट्रस्ट) भर्ती मॉडल्स को लागू करने की सलाह दे रहे हैं। इसके तहत यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि भविष्य में सरकार की ओर से जारी होने वाला प्रत्येक साक्षात्कार या नियुक्ति पत्र एक विशिष्ट, एन्क्रिप्टेड क्यूआर (QR) कोड से लैस हो, जिसे स्कैन करते ही अभ्यर्थी सीधे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग या संबंधित विभाग के सेंट्रलाइज्ड डिजिटल डेटाबेस पर जाकर उसकी सत्यता की जांच कर सकें। पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को नौकरी के नाम पर पैसे न दें, क्योंकि सभी वैध नियुक्तियां पूरी तरह से आधिकारिक सरकारी पोर्टलों के माध्यम से पारदर्शी रूप से संपन्न की जाती हैं।
