भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र में साइबर अपराधियों द्वारा म्यूल अकाउंट (Mule Accounts) के व्यापक इस्तेमाल को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। एक नई साइबर इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 के दौरान देशभर में 5,24,121 संदिग्ध म्यूल अकाउंट और डिजिटल पहचान चिन्हित की गईं। रिपोर्ट के अनुसार, यह अलग-अलग घटनाएं नहीं बल्कि संगठित और बड़े पैमाने पर संचालित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का संकेत है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चिन्हित मामलों में 5,20,559 वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) शामिल थे, जिनका कथित रूप से ऑनलाइन धोखाधड़ी में उपयोग किया जा रहा था। साइबर अपराधी तेजी से बनाए जा सकने वाले UPI VPA का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे विभिन्न खातों के माध्यम से आगे स्थानांतरित करने के लिए कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पेमेंट बैंकों में कुल संदिग्ध VPA गतिविधियों का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया, जो सभी श्रेणियों में सबसे अधिक है। वहीं UPI मर्चेंट खातों का हिस्सा लगभग 11 प्रतिशत रहा। जांच में यह भी संकेत मिला कि कुछ मर्चेंट खाते, विशेष रूप से पेमेंट एग्रीगेटर्स के माध्यम से ऑनबोर्ड किए गए खाते, कथित तौर पर वैध व्यापारिक लेनदेन की आड़ में धोखाधड़ी की रकम जुटाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में UPI के तेज विस्तार का फायदा उठाकर साइबर अपराधी बैंकिंग चैनलों के माध्यम से अवैध धन को तेजी से स्थानांतरित कर रहे हैं। इसमें समन्वित और संगठित साइबर गिरोहों की भूमिका लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है, जिससे डिजिटल भुगतान प्रणाली के लिए नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि म्यूल अकाउंट आज लगभग हर बड़े साइबर वित्तीय अपराध का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। उनके अनुसार, साइबर अपराधी पहले फर्जी या किराए के बैंक खाते, UPI आईडी और मोबाइल नंबर तैयार करते हैं, फिर इन्हीं माध्यमों से ठगी की रकम को कई खातों में तेजी से स्थानांतरित कर जांच एजेंसियों के लिए धन का पता लगाना कठिन बना देते हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए बैंकों, फिनटेक कंपनियों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करना तथा AI आधारित जोखिम विश्लेषण प्रणाली अपनाना आवश्यक है।
रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि भारत में डिजिटल भुगतान का कुल मूल्य वित्त वर्ष 2025 के लगभग ₹300 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक लगभग ₹907 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इसी अवधि में UPI लेनदेन का मूल्य लगभग ₹189 लाख करोड़ से बढ़कर ₹485 लाख करोड़ होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान के इस तेज विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा तंत्र और धोखाधड़ी रोकथाम उपायों को भी समान गति से मजबूत करना होगा, ताकि देश के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहे।
