अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के एक पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए उनकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले के दौरान आरोपी का आचरण संतोषजनक नहीं रहा और भुगतान को लेकर दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए।
यह मामला वर्ष 2010 में रिलीज हुई फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ा है। आरोप है कि फिल्म के निर्माण के लिए राजपाल यादव ने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का ऋण लिया था। फिल्म के व्यावसायिक रूप से असफल रहने के बाद कथित रूप से निर्धारित समय पर ऋण का भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद भुगतान के लिए जारी किए गए कई चेक अनादरित (बाउंस) हो गए, जिसके चलते परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की धारा 138 के तहत सात अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।
वर्ष 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को इन मामलों में छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने सजा पर अंतरिम रोक लगाते हुए बकाया राशि के भुगतान के लिए कई अवसर दिए।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, जून 2024 में हाईकोर्ट ने अस्थायी राहत देते हुए बकाया राशि का भुगतान करने के लिए ईमानदार प्रयास करने का निर्देश दिया था। हालांकि, अदालत का कहना है कि कई अवसर दिए जाने के बावजूद भुगतान पूरा नहीं किया गया। इसके बाद अंतरिम राहत वापस लेते हुए अदालत ने राजपाल यादव को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
अदालती आदेश के अनुपालन में उन्होंने आत्मसमर्पण किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में 16 फरवरी 2026 को उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई। ताजा आदेश में अदालत ने सजा को बरकरार रखा है, जिससे इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यह मामला वित्तीय लेनदेन में जारी किए गए चेक के सम्मान और अनुबंधित दायित्वों के पालन से जुड़े कानूनी प्रावधानों के महत्व को भी रेखांकित करता है। धारा 138 के तहत यदि पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस होता है और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के बाद भी भुगतान नहीं किया जाता, तो इसे दंडनीय अपराध माना जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन में चेक जारी करने से पहले भुगतान क्षमता सुनिश्चित करना और विवाद की स्थिति में समय पर समझौता या भुगतान करना आवश्यक है, क्योंकि चेक अनादरण के मामलों में आपराधिक दायित्व उत्पन्न हो सकता है।
