असम के कछार जिले में पुलिस ने नकली सोने की तस्करी और वित्तीय धोखाधड़ी के एक कथित प्रयास का पर्दाफाश करते हुए सिलचर के आलमबाग क्षेत्र से लगभग 7.23 किलोग्राम नकली सोना बरामद किया है। इस कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है। पुलिस को आशंका है कि यह मामला किसी बड़े संगठित धोखाधड़ी गिरोह से जुड़ा हो सकता है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, यह विशेष अभियान खुफिया सूचना के आधार पर चलाया गया। छापेमारी के दौरान हिरासत में लिए गए व्यक्ति के कब्जे से 112 नकली सोने के टुकड़े, जिनका कुल वजन लगभग 7.23 किलोग्राम है, बरामद किए गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर नकली सोने को असली बताकर बेचने की योजना बना रहा था, ताकि खरीदारों को धोखा देकर बड़ी रकम अवैध रूप से हासिल की जा सके। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली सोना कहां से लाया गया और क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल हैं।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति किसी बड़े संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा है या नहीं। इसके लिए संभावित सहयोगियों की पहचान, नकली सोने की आपूर्ति श्रृंखला और इस गिरोह के अन्य राज्यों या क्षेत्रों से संभावित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
कछार पुलिस ने लोगों से सोना या अन्य कीमती धातुएं खरीदते समय विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। पुलिस ने सलाह दी है कि खरीदारी केवल अधिकृत और विश्वसनीय ज्वेलर्स से करें तथा सोने की शुद्धता और हॉलमार्क का प्रमाणित परीक्षण अवश्य कराएं।
इसके साथ ही पुलिस ने नागरिकों से किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, नकली सोने की बिक्री या धोखाधड़ी की आशंका होने पर तुरंत निकटतम पुलिस थाने को सूचना देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे संगठित आर्थिक अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में जनता का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) के अनुसार, नकली सोने से जुड़े अधिकांश धोखाधड़ी मामलों में फर्जी हॉलमार्क, नकली शुद्धता प्रमाणपत्र और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर खरीदारों को भ्रमित किया जाता है। ऐसे मामलों से बचने के लिए उपभोक्ताओं को हमेशा प्रमाणित हॉलमार्क, वैध बिल और अधिकृत परीक्षण के बाद ही उच्च मूल्य के सोने की खरीद करनी चाहिए। वहीं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे संगठित वित्तीय अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए खुफिया समन्वय और तकनीकी जांच को और मजबूत करना चाहिए।
