भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) को वैश्विक स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि Egmont Group Plenary 2026 के दौरान अज़रबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित समारोह में FIU-IND को Best Egmont Case Award (BECA) 2026 में रनर-अप सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान भारत को लगभग ₹868 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में उत्कृष्ट वित्तीय खुफिया विश्लेषण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी कार्रवाई के लिए मिला।
Best Egmont Case Award को Egmont Group का सबसे प्रतिष्ठित परिचालन सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार उन मामलों को दिया जाता है, जिनमें वित्तीय खुफिया एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े जटिल मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा करती हैं। इस वर्ष दुनिया के 182 सदस्य देशों और क्षेत्रों से प्राप्त प्रविष्टियों में FIU-IND का मामला अंतिम दो मामलों में शामिल हुआ और उसे रनर-अप घोषित किया गया।
जांच की शुरुआत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी से हुई थी। इसके बाद FIU-IND ने वित्तीय लेनदेन का गहन विश्लेषण करते हुए एक अत्यंत संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से अर्जित लगभग ₹868 करोड़ की अवैध राशि को 5,000 से अधिक म्यूल बैंक खातों और कई देशों में फैले जटिल क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के माध्यम से छिपाने और स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया।
जांच के दौरान FIU-IND ने Egmont Secure Web (ESW) के माध्यम से विभिन्न देशों की वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान किया। इस सहयोग से सीमा पार होने वाले क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन का पता लगाने, धन के प्रवाह का विश्लेषण करने और वैश्विक स्तर पर फैले मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की पहचान करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली। अधिकारियों के अनुसार, समय पर साझा की गई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय खुफिया जानकारी ने पूरे मामले की जांच को निर्णायक दिशा दी और यह साबित किया कि संगठित वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग कितना महत्वपूर्ण है।
FIU-IND की ऑपरेशनल एनालिसिस रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने व्यापक कार्रवाई शुरू की। एजेंसी ने 13 स्थानों पर छापेमारी कर ₹47 लाख नकद और लगभग ₹13.6 करोड़ मूल्य की USDT क्रिप्टोकरेंसी जब्त की। इसके अलावा ₹8.67 करोड़ मूल्य की संपत्तियां अटैच की गईं तथा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दो अभियोजन शिकायतें भी अदालत में दायर की गईं।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह सम्मान वित्तीय खुफिया के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। साथ ही यह उपलब्धि देश के एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और काउंटर फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म (CFT) ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में FIU-IND की उन्नत विश्लेषण क्षमता, घरेलू एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रमाण है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आधुनिक साइबर अपराध केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क, म्यूल बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए संचालित वैश्विक वित्तीय तंत्र सक्रिय रहता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में वित्तीय खुफिया एजेंसियों, साइबर जांच इकाइयों, प्रवर्तन एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार FIU-IND को मिला यह सम्मान न केवल भारत की जांच क्षमता को वैश्विक पहचान दिलाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय निगरानी और बहु-देशीय सहयोग के माध्यम से बड़े साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
