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फर्स्ट एसी कोच में निजी सजावट पर रेलवे सख्त: बिना अनुमति डेकोरेटर की एंट्री के मामले में जांच के आदेश, मुख्य टिकट निरीक्षक निलंबित

Team The420
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भारतीय रेलवे ने बाल्हारशाह–मुंबई नांदिग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में बिना अनुमति निजी डेकोरेटर के प्रवेश और आरक्षित कूपे की सजावट के मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। मामले में ड्यूटी पर तैनात मुख्य टिकट निरीक्षक (चीफ टिकट इंस्पेक्टर) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। रेलवे का कहना है कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यात्री शुभम और सोनाली ने 6 जुलाई को जलना से मुंबई की यात्रा के लिए नांदिग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी में जी कूपे बुक किया था। दोनों यात्रियों को छत्रपति संभाजीनगर स्टेशन से ट्रेन में सवार होना था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि निजी समारोह के लिए दंपति ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जलना के एक डेकोरेटर को कूपे सजाने का काम सौंपा था।

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जांच के अनुसार डेकोरेटर का एक प्रतिनिधि सजावट का सामान लेकर जलना स्टेशन से फर्स्ट एसी कोच में चढ़ गया और यात्रियों के ट्रेन में सवार होने से पहले ही कूपे को सजा दिया। रेलवे ने स्पष्ट किया कि फर्स्ट एसी जैसे प्रीमियम आरक्षित कोच में किसी बाहरी व्यक्ति का इस प्रकार प्रवेश पूरी तरह अनधिकृत था और यह सुरक्षा तथा प्रवेश नियंत्रण से जुड़े स्थापित नियमों का उल्लंघन है।

रेलवे ने कहा कि इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए ड्यूटी पर मौजूद मुख्य टिकट निरीक्षक को विभागीय जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि डेकोरेटर को कोच में प्रवेश कैसे मिला, ऑनबोर्ड स्टाफ और स्टेशन कर्मचारियों ने निर्धारित जांच प्रक्रिया का पालन किया या नहीं, तथा क्या इस घटना में किसी अन्य रेलवे कर्मचारी या निजी व्यक्ति की भी भूमिका थी।

अधिकारियों के अनुसार जांच का दायरा केवल डेकोरेटर के प्रवेश तक सीमित नहीं रहेगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि स्टेशन परिसर या ट्रेन के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल में कहीं चूक हुई थी या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय भी सुझाए जाएंगे।

रेलवे ने दोहराया कि आरक्षित कोचों, विशेष रूप से फर्स्ट एसी डिब्बों में प्रवेश पूरी तरह नियंत्रित होता है। ऐसे कोचों में केवल अधिकृत रेलवे कर्मचारी और वैध टिकटधारक यात्रियों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। किसी भी अपवाद की स्थिति में निर्धारित नियमों के तहत पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है।

इस घटना ने प्रीमियम श्रेणी के कोचों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और यदि किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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