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दीवारों में छिपी तिजोरियां, बिस्तर में नकदी और 13 किलो सोना… पूर्व एआरटीओ के ठिकानों पर विजिलेंस का बड़ा खुलासा, ₹35 करोड़ की संपत्ति का पता चला

Team The420
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उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके लखनऊ के अलीगंज स्थित आवास पर छापेमारी की। विजिलेंस के अनुसार तलाशी के दौरान करीब ₹35 करोड़ की चल-अचल संपत्ति का पता चला है। कार्रवाई में 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी के जेवर और चांदी के बिस्किट, घर के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर रखी गई ₹1.62 करोड़ नकदी तथा करोड़ों रुपये के निवेश और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। बरामद संपत्तियों के स्रोत और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

छापेमारी के दौरान जांच टीम को घर के भीतर दो बड़ी तिजोरियां मिलीं, जिन्हें दीवारों और अलमारियों के पीछे इस तरह छिपाया गया था कि सामान्य तौर पर उनका पता लगाना आसान नहीं था। इन तिजोरियों से भारी मात्रा में सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान बरामद हुआ। इसके अलावा बिस्तरों और घर के विभिन्न हिस्सों में छिपाकर रखे गए नोटों के बंडल भी मिले, जिनकी गिनती के बाद नकदी ₹1.62 करोड़ से अधिक निकली। जांच के दौरान घर की साज-सज्जा, महंगे घरेलू उपकरणों और अन्य विलासिता संबंधी खर्चों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।

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प्रारंभिक जांच में कुल संपत्ति का मूल्य करीब ₹35 करोड़ आंका गया है, जिसमें लगभग ₹20 करोड़ की चल संपत्ति शामिल है। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार बरामद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि संपत्तियां किन स्रोतों से अर्जित की गईं और क्या इनमें बेनामी निवेश या अन्य वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मौजूद हैं।

ललित कुमार पिछले वर्ष आगरा से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच पहले से चल रही थी। वर्ष 2024 में कानपुर के एंटी करप्शन थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उपलब्ध साक्ष्यों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विजिलेंस ने उनके आवास पर तलाशी अभियान चलाया।

जांच एजेंसियों के अनुसार भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप कई वर्ष पुराने हैं। वर्ष 2020 में कानपुर में तैनाती के दौरान उन पर ज्ञात आय के स्रोतों से ₹68 लाख से अधिक की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगा था। भ्रष्टाचार निवारण संगठन की जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद जून 2024 में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में मई 2025 में एआरटीओ पद पर प्रोन्नति मिलने के बाद मामले की विस्तृत जांच विजिलेंस को सौंप दी गई। अब उनकी पूरी सेवा अवधि के दौरान अर्जित संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन का मिलान किया जा रहा है।

तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों से लखनऊ के अलीगंज, इंदिरा नगर और अंसल एपीजेओ क्षेत्र के अलावा नोएडा में आवासीय भूखंड और फ्लैट होने के प्रमाण मिले हैं। इसके अतिरिक्त मोहनलालगंज और ग्राम बेहरिया में कृषि भूमि से जुड़े अभिलेख भी बरामद हुए हैं। जांच टीम को एक इनोवा, एक आई-20 कार, लाइसेंसी रिवॉल्वर तथा बैंक खातों, डाकघर निवेश और म्यूचुअल फंड में ₹1 करोड़ से अधिक के निवेश से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। इन सभी परिसंपत्तियों के स्वामित्व, खरीद के स्रोत और भुगतान के तरीकों की अलग-अलग जांच की जा रही है।

विजिलेंस का कहना है कि बरामद दस्तावेजों के आधार पर संबंधित विभागों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति, सहयोगी या नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारित कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी और अन्य संपत्तियों के खुलासे के बाद पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कार्रवाई करने वाली विजिलेंस टीम को ₹1 लाख का पुरस्कार देने की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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