उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में साइबर ठगों ने शादी का झांसा और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर एक युवती से लगभग ₹15 लाख की ठगी कर ली। जालसाजों ने इंस्टाग्राम पर मैरिज ब्यूरो के विज्ञापन के माध्यम से संपर्क किया, खुद को यूनाइटेड किंगडम (UK) का कारोबारी बताकर युवती का विश्वास जीता और बाद में फर्जी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर करीब एक सप्ताह तक मानसिक दबाव में रखा। पीड़िता के भाई की शिकायत पर पिपराइच थाने में मामला दर्ज कर पुलिस जांच में जुट गई है।
पुलिस के अनुसार, युवती ने इंस्टाग्राम पर एक मैरिज ब्यूरो का विज्ञापन देखा था। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उसकी बातचीत व्हाट्सएप पर राहुल सिंघानिया नाम बताने वाले व्यक्ति से शुरू हुई। आरोपी ने खुद को UK में रहने वाला व्यवसायी बताया और भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करने की इच्छा जताई। भरोसा जीतने के लिए उसने महंगे सूट, गाउन, डायमंड रिंग और अन्य आभूषणों की तस्वीरें और वीडियो भेजे।
इसके बाद आरोपी ने युवती से पहचान संबंधी दस्तावेज लेकर महंगे उपहारों का पार्सल भेजने का दावा किया। कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को पार्सल एजेंट बताकर फोन किया और कहा कि पार्सल में 10,000 अमेरिकी डॉलर सहित कीमती सामान है। पार्सल छुड़ाने के नाम पर पहले ₹45,000 जमा कराए गए। इसके बाद इमिग्रेशन शुल्क, कस्टम ड्यूटी, टैक्स और अन्य शुल्कों के नाम पर अलग-अलग किस्तों में लगातार रकम मांगी जाती रही।
जब पीड़िता ने संदेह जताया तो जालसाजों ने खुद को CBI और आयकर विभाग का अधिकारी बताकर संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि पार्सल में करोड़ों रुपये का सोना और हीरे हैं तथा यदि तत्काल भुगतान नहीं किया गया तो मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तारी और जेल हो सकती है।
इस डर से युवती करीब एक सप्ताह तक जालसाजों के लगातार संपर्क में रही। बदनामी और गिरफ्तारी के भय के कारण उसने घर में बहन की शादी और मकान निर्माण के लिए रखी गई लगभग ₹15 लाख की बचत आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों, UPI आईडी और QR कोड के माध्यम से ट्रांसफर कर दी।
घटना का पता चलने पर पीड़िता के भाई पंकज कश्यप ने पिपराइच थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने साइबर ठगी की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिन बैंक खातों, UPI आईडी और डिजिटल माध्यमों से धनराशि ट्रांसफर की गई है, उन्हें ट्रेस किया जा रहा है। साइबर सेल की सहायता से आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी अब शादी, विदेश से उपहार और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को लंबे समय तक दबाव में रखते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती और न ही जांच के नाम पर किसी खाते में पैसा जमा कराने का निर्देश देती है। ऐसे मामलों में तुरंत कॉल काटकर पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर मिले अपरिचित लोगों, विदेश से उपहार भेजने के दावों और कस्टम, टैक्स या जांच एजेंसियों के नाम पर मांगे जाने वाले भुगतान से सतर्क रहना चाहिए। समय रहते सतर्कता बरतने और तुरंत शिकायत दर्ज कराने से ठगी की राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
