उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में तालाब से 31 पासपोर्ट बरामद होने के मामले में पुलिस ने दो कथित ट्रैवल एजेंटों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी विदेश में नौकरी दिलाने, वीजा बनवाने और पासपोर्ट नवीनीकरण के नाम पर लोगों से पासपोर्ट लेते थे और बाद में उन्हें वापस करने के बजाय कथित रूप से तालाब में फेंक दिया।
मामला 6 जुलाई को सामने आया, जब कछवां थाना क्षेत्र के तुलापुर गांव में स्थानीय मछुआरे तालाब में मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान उनके जाल में एक भारी बोरी फंस गई। बोरी को बाहर निकालकर खोलने पर उसमें गिट्टी के साथ कई पासपोर्ट मिले। पुलिस ने बाद में पुष्टि की कि कुल 31 पासपोर्ट बरामद किए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में एक विशेष जांच टीम गठित की। जांचकर्ताओं ने भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद दो संदिग्धों की पहचान की।
पुलिस ने इसके बाद जलालपुर निवासी ओमकार गुप्ता और पसियाही निवासी खाजा यादव को गिरफ्तार किया। दोनों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया और न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से बताया कि कई लोगों ने पासपोर्ट नवीनीकरण, वीजा बनवाने और विदेश में नौकरी दिलाने के लिए उन्हें अपने पासपोर्ट सौंपे थे। आरोप है कि ये पासपोर्ट लंबे समय तक उनके पास पड़े रहे। कई पासपोर्टों की वैधता समाप्त हो जाने और उन्हें संबंधित लोगों को वापस न कर पाने के कारण आरोपियों ने कथित रूप से सभी पासपोर्टों को एक पोटली में बांधकर गिट्टी से भरी बोरी में रखा और तालाब में फेंक दिया।
जांच में पता चला है कि बरामद 31 पासपोर्ट 29 अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर जारी किए गए थे। पुलिस अब सभी पासपोर्ट धारकों से संपर्क कर यह पता लगा रही है कि उन्होंने किन परिस्थितियों में अपने दस्तावेज आरोपियों को दिए थे और क्या वे विदेश भेजने, वीजा या अन्य सेवाओं के नाम पर किसी वित्तीय धोखाधड़ी का भी शिकार हुए।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि मामला केवल पासपोर्टों के अनुचित निस्तारण तक सीमित है या इसके पीछे विदेश भेजने, इमिग्रेशन सेवाओं या फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा कोई बड़ा कथित नेटवर्क सक्रिय था। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, संचार रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता या अतिरिक्त धोखाधड़ी के तथ्य सामने आते हैं, तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोप प्रारंभिक जांच और अब तक एकत्र किए गए साक्ष्यों पर आधारित हैं। आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
