फ्रांस की अपीलीय अदालत ने दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन के खिलाफ यूरोपीय संघ (EU) के सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सजा में आंशिक राहत दी है। संशोधित फैसले के तहत उनकी सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने पर लगी रोक को घटाकर 15 महीने कर दिया गया है, जबकि कारावास की सजा भी कम कर दी गई है।
अदालत के फैसले के अनुसार, ले पेन को अब तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है, जिसमें दो वर्ष की सजा निलंबित रहेगी और एक वर्ष इलेक्ट्रॉनिक निगरानी (एंकल मॉनिटर) के साथ पूरी करनी होगी। इस फैसले के बाद सैद्धांतिक रूप से उनके लिए वर्ष 2027 के फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने की संभावना बनी हुई है। हालांकि, ले पेन पहले सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि यदि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की शर्त के साथ चुनाव लड़ना पड़े, तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगी।
57 वर्षीय मरीन ले पेन को वर्ष 2025 में निचली अदालत ने पांच वर्ष तक सार्वजनिक पद धारण करने या चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध तथा चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती दी थी।
यह मामला उस अवधि से जुड़ा है जब ले पेन वर्ष 2004 से 2017 के बीच यूरोपीय संसद की सदस्य थीं। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने और उनकी पार्टी से जुड़े अन्य लोगों ने यूरोपीय संघ के संसाधनों का उपयोग ऐसे कर्मचारियों के वेतन के भुगतान के लिए किया, जिन्होंने कथित रूप से वास्तविक संसदीय कार्य नहीं किया था। अभियोजकों का दावा है कि इस व्यवस्था के माध्यम से यूरोपीय संघ के धन का दुरुपयोग किया गया।
ले पेन ने पूरे मामले में किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया है। उन्होंने तथा उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने फैसले के विरुद्ध अपील की थी। उनकी पार्टी ने पहले भी इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
मरीन ले पेन वर्ष 2017 और 2022 के फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनावों में दूसरे स्थान पर रही थीं और वर्ष 2027 में फिर से राष्ट्रपति पद की प्रमुख दावेदारों में मानी जा रही थीं। हालांकि, ताजा न्यायिक फैसले के बाद उनकी राजनीतिक रणनीति को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ले पेन चुनाव नहीं लड़ती हैं, तो उनकी पार्टी के अध्यक्ष जॉर्डन बार्डेला संभावित उम्मीदवार के रूप में सामने आ सकते हैं।
अदालत के बाहर ले पेन ने मीडिया से कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने संकेत दिया है कि वह फैसले पर अपनी पार्टी के सदस्यों को संबोधित करेंगी।
फिलहाल न्यायालय ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, जबकि सजा में संशोधन किया गया है। मामले से जुड़े कानूनी और राजनीतिक प्रभाव आने वाले महीनों में और स्पष्ट हो सकते हैं। हालांकि, न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज आरोपों और अदालत के निर्णय के आधार पर ही आगे की संवैधानिक एवं चुनावी प्रक्रियाएं तय होंगी।
